Edited By Rohini Oberoi,Updated: 11 Mar, 2026 03:57 PM

इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार निकल चुकी हैं। इसका सबसे बुरा असर उन एशियाई देशों पर पड़ा है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं।...
Israel-Iran War Impact on Global Oil Prices : इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार निकल चुकी हैं। इसका सबसे बुरा असर उन एशियाई देशों पर पड़ा है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और बांग्लादेश से लेकर वियतनाम तक हर तरफ पेट्रोल पंपों पर किलोमीटर लंबी लाइनें और पैनिक बाइंग (घबराहट में खरीदारी) का मंजर है।
दुनिया का हाल: कहां-कहां मची है त्राहि-त्राहि?
| देश |
मौजूदा स्थिति |
सरकार के कदम |
| बांग्लादेश |
95% तेल आयात पर निर्भर; पंपों पर रात भर लंबी कतारें। |
पेट्रोल की राशनिंग शुरू (कारों के लिए 10L रोज); डिपो पर सेना तैनात। |
| पाकिस्तान |
कीमतों में 20% उछाल; LNG सप्लाई प्रभावित। |
स्कूल 2 हफ्ते के लिए बंद, सरकारी गाड़ियों में 60% कटौती; वर्क फ्रॉम होम। |
| वियतनाम |
कीमतें 32% तक बढ़ीं, कई पंप बंद हुए। |
आयात टैक्स हटाया; जनता से साइकिल चलाने और कारपूलिंग की अपील। |
| थाईलैंड |
74% तेल मिडल ईस्ट से आता है, पैनिक बाइंग जारी। |
डीजल की कीमतों पर कैप (सीमा) लगाई; तेल का निर्यात पूरी तरह बंद। |
| द. कोरिया |
4 साल की सबसे ऊंची कीमतें (1900 वॉन/लीटर)। |
इमरजेंसी मीटिंग; रिफाइनरियों की जांच और प्राइस कैप की योजना। |
क्यों लगा है सप्लाई पर ब्रेक?
रॉयटर्स के मुताबिक युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का समुद्री रास्ता प्रभावित हुआ है। दुनिया का लगभग 20% तेल इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान ने अगर इस रास्ते को पूरी तरह ब्लॉक किया तो कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं जिससे एशिया की आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाएं ढह सकती हैं।
भारत की स्थिति: क्या हमारे यहां भी होगी किल्लत?
दुनिया भर में मचे इस शोर के बीच भारत के लिए राहत की खबर है। हालांकि कच्चा तेल महंगा होने का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है लेकिन यहां तेल की कोई कमी नहीं है। भारत के पास रिफाइनरियों और सप्लाई चेन में करीब 50 दिनों का तेल भंडार मौजूद है। अगर हम स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को भी जोड़ लें तो भारत के पास 6 से 8 हफ्तों का बैकअप है। यानी दो महीने तक सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं आएगी। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने साफ किया है कि देश में फ्यूल सप्लाई मजबूत है। मंत्रालय ने एक स्पेशल कंट्रोल रूम बनाया है जो पल-पल की स्थिति पर नजर रख रहा है।