विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना को मंजूरी...अनुराग ठाकुर ने समझाया पूरा प्लान

Edited By Updated: 01 Jun, 2023 11:31 AM

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केंद्र सरकार ने सहकारिता क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना को बुधवार को मंजूरी दे दी। सहकारी क्षेत्र में खाद्यान्न भंडारण क्षमता 700 लाख टन बढ़ाने के लिए एक लाख करोड़ रुपए की लागत आएगी।

नेशनल डेस्क: केंद्र सरकार ने सहकारिता क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना को बुधवार को मंजूरी दे दी। सहकारी क्षेत्र में खाद्यान्न भंडारण क्षमता 700 लाख टन बढ़ाने के लिए एक लाख करोड़ रुपए की लागत आएगी। सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि देश में अनाज भंडारण क्षमता फिलहाल 1450 लाख टन है। उन्होंने कहा कि अगले 5 साल में भंडारण क्षमता बढ़ाकर 2150 लाख टन की जाएगी। यह क्षमता सहकारी क्षेत्र में बढ़ेगी।

 

ठाकुर ने प्रस्तावित योजना को सहकारी क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा खाद्यान्न भंडारण कार्यक्रम बताया। इसके तहत प्रत्येक प्रखंड में 2,000 टन क्षमता के गोदाम बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस कदम का उद्देश्य भंडारण सुविधाओं की कमी से अनाज को होने वाले नुक्सान से बचाना, किसानों को संकट के समय अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचने से रोकना, आयात पर निर्भरता कम करना तथा गांवों में रोजगार के अवसर सृजित करना है।  मंत्री ने कहा कि अधिक भंडारण क्षमता से किसानों के लिए परिवहन लागत कम होगी और खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी। देश में सालाना करीब 3100 लाख टन खाद्यान्न का उत्पादन होता है लेकिन मौजूदा क्षमता के तहत गोदामों में कुल उपज का 47 प्रतिशत तक ही रखा जा सकता है। 

 

CITIS 2.0 कार्यक्रम को भी मंजूरी 

सरकार ने CITIS 2.0 कार्यक्रम को मंजूरी दे दी जो एकीकृत शहरी प्रबंधन पर जोर देने के साथ ही ‘सर्कुलर’ अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाली परियोजनाओं का समर्थन करता है। अनुराग ठाकुर ने इस निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि CITIS (सिटीज इनवैस्टमैंट टू इनोवेट, इंटीग्रेट एंड सस्टेन) आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, फ्रांसीसी विकास एजैंसी (AFD), यूरोपीय संघ (EU) और राष्ट्रीय नगर कार्य संस्थान (NIUA) का एक संयुक्त कार्यक्रम है।

 

इस कार्यक्रम की शुरुआत मौजूदा वित्त वर्ष में होगी और यह 4 साल तक चलेगा। उन्होंने कहा कि इस योजना के वित्त पोषण के लिए 1760 करोड़ रुपए या 20 करोड़ यूरो का ऋण लिया जाएगा। इसके अलावा AFD और KFW 10-10 करोड़ यूरो का योगदान देंगे वहीं यूरोपीय संघ से 106 करोड़ रुपए का तकनीकी सहायता अनुदान मिलेगा। CITIS 2.0 का मकसद CITIS 1.0 से मिली सीख और सफलताओं का लाभ उठाना और उसे बढ़ाना है।

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