भारतीयों के लिए बड़ी खुशखबरी! यूरोप के साथ होने जा रही है ये ‘बड़ी डील’

Edited By Updated: 12 Jan, 2026 07:53 PM

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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से अटकी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक चला, तो जनवरी के अंत तक इस अहम समझौते पर मुहर लग सकती है। इसके संकेत खुद जर्मनी के चांसलर...

नेशनल डेस्क: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से अटकी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक चला, तो जनवरी के अंत तक इस अहम समझौते पर मुहर लग सकती है। इसके संकेत खुद जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने दिए हैं, जो अपनी पहली भारत यात्रा पर हैं। अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद मर्ज़ के बयान ने भारतीय अर्थव्यवस्था और कारोबार जगत में नई उम्मीद जगा दी है।

जनवरी का आखिरी हफ्ता बन सकता है टर्निंग पॉइंट

अहमदाबाद में बातचीत के दौरान चांसलर मर्ज़ ने कहा कि यदि जनवरी के अंत तक वार्ता पूरी हो जाती है, तो यूरोपीय आयोग और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष समझौते पर हस्ताक्षर के लिए भारत आ सकते हैं। जर्मन सरकार के सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और मर्ज़ के बीच बेहद गहन चर्चा हुई है, जिससे इसी महीने डील साइन होने की संभावनाएं काफी मजबूत हो गई हैं।

इसी बीच गुजरात में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी साफ किया कि भारत-EU FTA अपने अंतिम चरण में है। आम लोगों के लिए इसका सीधा असर यह होगा कि यूरोपीय बाजारों में भारतीय उत्पादों की पहुंच आसान होगी, जबकि यूरोप की आधुनिक तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद भारत में अधिक सुलभ हो सकेंगे।

वैश्विक संरक्षणवाद पर मर्ज़ की चिंता

चांसलर मर्ज़ ने मौजूदा वैश्विक हालातों पर चिंता जताते हुए कहा कि दुनिया इस समय “दुर्भाग्यपूर्ण संरक्षणवाद के पुनर्जागरण” के दौर से गुजर रही है। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए संकेत दिया कि भारत पर रूसी तेल को लेकर अमेरिका का दबाव और चीन द्वारा खनिजों के निर्यात पर लगाए गए नियंत्रण, इसी प्रवृत्ति के उदाहरण हैं।

बीते वर्ष चीन के निर्यात प्रतिबंधों और अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध के चलते वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई थी, जिसका असर जर्मन कार उद्योग तक पर पड़ा। ऐसे माहौल में भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती देने के साथ-साथ चीन और अमेरिका पर निर्भरता घटाने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

सुरक्षा और तकनीक में भी बढ़ेगा सहयोग

जर्मनी सुरक्षा मुद्दों पर भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है, ताकि रूस पर उसकी निर्भरता कम हो सके। इसी दिशा में दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वास्थ्य क्षेत्र और क्रिटिकल मिनरल्स से जुड़े कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये समझौते भारत-जर्मनी सहयोग को नई गति और मजबूती देंगे।

कुल मिलाकर, जनवरी का अंत भारत और यूरोप के रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है- एक ऐसा अध्याय, जो वैश्विक व्यापार संतुलन को भी नई दिशा दे सकता है।

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