Diwali 2025 Shubh Muhurt:वाली पर भद्रा और राहुकाल का प्रभाव, लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त के लिए मिलेगा केवल इतना ही समय

Edited By Updated: 20 Oct, 2025 07:56 AM

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कार्तिक अमावस्या के शुभ अवसर पर आज पूरे देश में दिवाली का पर्व पूरे उत्साह और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। दीपों की रौशनी से जगमगाती इस रात में धन, समृद्धि और शुभता की देवी लक्ष्मी का पूजन विशेष फलदायक माना जाता है। लेकिन इस साल दिवाली पर दो प्रमुख...

नई दिल्ली: कार्तिक अमावस्या के शुभ अवसर पर आज पूरे देश में दिवाली का पर्व पूरे उत्साह और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। दीपों की रौशनी से जगमगाती इस रात में धन, समृद्धि और शुभता की देवी लक्ष्मी का पूजन विशेष फलदायक माना जाता है। लेकिन इस साल दिवाली पर दो प्रमुख ज्योतिषीय पहलुओं – भद्रा और राहुकाल – का भी प्रभाव देखने को मिलेगा। ऐसे में यह जरूरी है कि पूजन सही समय पर किया जाए ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।

क्या है इस बार की भद्रा का प्रभाव?
इस बार दिवाली की सुबह भद्रा काल का संयोग बन रहा है। भद्रा काल प्रातः 6:08 बजे से 8:15 बजे तक रहेगा। लेकिन राहत की बात यह है कि यह भद्रा स्वर्गलोक में रहेगी, अतः इसका पृथ्वी लोक पर यानी हमारी दिवाली पूजा पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

राहुकाल में क्यों न करें पूजा?
दिवाली के दिन एक और सावधानी जरूरी है – राहुकाल से बचाव। राहुकाल में किसी भी तरह का शुभ कार्य वर्जित माना जाता है। इस वर्ष 20 अक्टूबर को राहुकाल सुबह 7:46 बजे से 9:24 बजे तक रहेगा। अतः इस समय के दौरान लक्ष्मी पूजन या अन्य धार्मिक कार्य करने से बचना चाहिए।

लक्ष्मी पूजन के तीन विशेष मुहूर्त
भद्रा और राहुकाल के समय को ध्यान में रखते हुए, मां लक्ष्मी की पूजा के लिए तीन शुभ मुहूर्त बताए गए हैं:

प्रदोष काल:
शाम 5:46 बजे से रात 8:18 बजे तक
यह काल सबसे उपयुक्त समय माना जाता है, जब वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर होता है।

वृषभ लग्न काल:
शाम 7:08 बजे से रात 9:03 बजे तक
यह काल लक्ष्मी पूजन के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।

सर्वोत्तम काल (शुभतम मुहूर्त):
शाम 7:08 बजे से रात 8:18 बजे तक
इस अवधि में लगभग 1 घंटा 11 मिनट का समय उपलब्ध होगा, जो कि पूजा के लिए सर्वोत्तम है।

कैसे करें दिवाली पर मां लक्ष्मी-गणेश की पूजा?
पूजा स्थल उत्तर या पूर्व दिशा में रखें।
एक साफ चौकी पर लाल या गुलाबी कपड़ा बिछाएं।
मां लक्ष्मी की मूर्ति को दाईं ओर और भगवान गणेश को बाईं ओर स्थापित करें।
लक्ष्मी जी को खील, बताशे, कमल के फूल, चावल, मिठाई और इत्र अर्पित करें।
घी या तेल का दीपक जलाकर, “ॐ जय लक्ष्मी माता” की आरती पूरे परिवार के साथ करें।
पूजा के बाद घर के हर कोने में दीपक जलाएं – खासकर मुख्य द्वार, छत, पानी के स्रोतों और अंधेरे कोनों में।
मुख्य दीपक पूरी रात जलने दें, यह शुभ संकेत माना जाता है।

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