सत्ता का दुरुपयोग करते हुए 'AAP' हमारे प्रेस प्रतिष्ठान, होटल पर छापे डलवा रही : पंजाब केसरी समूह

Edited By Updated: 18 Jan, 2026 12:01 AM

you are misusing your power by ordering raids on our press establishment and hot

पंजाब केसरी अखबार समूह ने शनिवार को आरोप लगाया कि पंजाब की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) उसके और उसके प्रवर्तकों के बारे में झूठी बातें फैला रही है। इस आरोप से कुछ दिन पहले मीडिया समूह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर दावा किया था कि उसकी...

नेशनल डेस्क: पंजाब केसरी अखबार समूह ने शनिवार को आरोप लगाया कि पंजाब की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) उसके और उसके प्रवर्तकों के बारे में झूठी बातें फैला रही है। इस आरोप से कुछ दिन पहले मीडिया समूह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर दावा किया था कि उसकी खबरों के कारण कानून प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा उसे परेशान किया जा रहा है और कई छापों के जरिये उसे निशाना बनाया जा रहा है। अपने नए बयान में, समूह ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार स्वतंत्र रिपोर्टिंग को ‘‘दबाने'' के लिए उसे निशाना बना रही है। ‘पीटीआई-भाषा' ने आम आदमी पार्टी (आप) और उसकी सरकार से प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की, लेकिन फिलहाल कोई जवाब नहीं मिला।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने मीडिया समूह के खिलाफ की गई कार्रवाई की निंदा की है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने पंजाब पुलिस की छापेमारी को ‘‘लोकतंत्र विरोधी'' करार दिया और मीडियाकर्मियों से इस घटना के खिलाफ प्रदर्शन करने का आह्वान किया। पात्रा ने दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में कहा, “अरविंद केजरीवाल कभी नहीं बदल सकते। दिल्ली के शीशमहल से निकलने के बाद, अब वह पंजाब के हवामहल में रह रहे हैं… केजरीवाल के इशारे पर अखबार के खिलाफ कार्रवाई की गई।”

पंजाब केसरी अखबार समूह ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा कई छापेमारी के जरिये उसे निशाना बनाया जा रहा है। समूह ने यह भी कहा कि ये सिलसिला तब शुरू हुआ, जब उसने आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ विपक्ष के आरोपों पर एक ‘‘निष्पक्ष और संतुलित'' खबर प्रकाशित की थी। अखबार समूह ने आरोप लगाया कि ‘‘प्रेस को डराने के मकसद'' से निशाना बनाकर ये छापे मारे गए। अपने बयान में पंजाब सरकार ने “लक्षित हमले” के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि यह दावा कई वैधानिक प्राधिकरणों द्वारा कानून के दायरे में रहकर उजागर किए गए गंभीर उल्लंघन से ध्यान हटाने की कोशिश है।

अखबार समूह ने शनिवार को दावा किया कि पिछले साल 31 अक्टूबर के बाद से अखबार पर सरकार की निगरानी बढ़ गई है, जब समाचार पत्र ने केजरीवाल के राज्य आवास में रहने के बारे में खबरें प्रकाशित की थीं। इसने कहा, ‘‘खबर सामने आने के तुरंत बाद, अगले कुछ दिनों में सरकारी तंत्र का दुरुपयोग हुआ और पंजाब केसरी एवं जग बाणी अखबारों का वितरण बाधित हुआ। आपूर्ति ट्रकों को इस हद तक रोका गया कि कुछ हिस्सों में अखबार का वितरण नहीं हो सका या आपूर्ति शाम तक विलंबित हो गई।'' समूह ने आरोप लगाया, ‘‘जब लोगों ने पंजाब सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाना शुरू किया, तो अपनी ग़लतियों को छिपाने की बेताबी में, बेतुका बहाना पेश किया गया कि सरकार समाचारपत्र आपूर्ति वैन में मादक पदार्थ/हथियार की तस्करी की जांच कर रही थी, जबकि उसे अच्छी तरह पता था कि यह झूठ था।''

अखबार समूह ने आरोप लगाया कि जब ये ‘हथकंडे' कारगर साबित नहीं हुए, तो सरकार ने उस पर आर्थिक दबाव बनाना शुरू कर दिया और विज्ञापन जारी करना पूरी तरह बंद कर दिया। इस बयान पर विजय कुमार चोपड़ा, अविनाश चोपड़ा और अमित चोपड़ा ने हस्ताक्षर किए हैं। अखबार समूह ने कहा, ‘‘11, 12, 13 और 14 जनवरी को, पूरे पंजाब में समूह के प्रेस और जालंधर के एक होटल को विभिन्न विभागों द्वारा उत्पीड़न/जांच का सामना करना पड़ा।'' समूह ने आरोप लगाया कि एक होटल में बिजली काट देना सरकार द्वारा उसे परेशान करने की एक और दमनकारी कार्रवाई है। इसने कहा कि प्रबंधन ने कानूनी कदम उठाए हैं। इसने दावा किया कि 15 जनवरी को जालंधर स्थित उसकी प्रिंटिंग प्रेस के बंद होने पर लगभग सौ पुलिसकर्मियों को वहां भेजा गया था।

अखबार समूह ने कहा, “ताले तोड़ दिए गए और पुलिस ने दीवार फांदकर मौके पर मौजूद कुछकर्मियों की पिटाई की। कथित तौर पर पुलिस की मौजूदगी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निरीक्षण के लिए थी।” इसने कहा, “जनता देख सकती है कि निशाना प्रदूषण नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है।” समूह ने कहा कि सरकार यह झूठा विमर्श गढ़ रही है कि पंजाब केसरी शराब के कारोबार में शामिल है। समूह ने कहा, ‘‘चोपड़ा परिवार ने अपने पैतृक शहर जालंधर में पार्क प्लाजा होटल का निर्माण किया है। यह होटल जालंधर में पर्यटन और रोजगार के लिए बुनियादी ढांचा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया था।'' इसने कहा कि होटलों की तुलना शराब के व्यापार से करना शर्मनाक है, क्योंकि होटल के मेहमानों को शराब परोसना आतिथ्य कारोबार का एक छोटा लेकिन जरूरी हिस्सा है।

अखबार समूह ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने अपनी क्षमता का गलत इस्तेमाल करते हुए रातों-रात उसके शराब लाइसेंस रद्द कर दिए। समूह ने कहा कि आप सरकार के कार्यकाल में ही होटल के शराब लाइसेंस जारी किए गए थे। इसने आरोप लगाया, ‘‘यह कहानी बनाना कि अखबार के व्यापार की आड़ में शराब का व्यापार किया जा रहा है, न सिर्फ गलत है, बल्कि असल में यह आप की अखबार समूह को बदनाम करने की कोशिश में उनकी बेचैनी को दर्शाता है और ऐसा लगता है कि यह उनकी मानक संचालन प्रक्रिया का हिस्सा बन गया है।''

समूह ने दावा किया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी 13 जनवरी को होटल गए थे और उसी दिन, बिना सुनवाई का मौका दिए, ‘‘गैर-कानूनी'' तरीके से बिजली काटने का निर्देश दिया। इसने आरोप लगाया, ‘‘एक ही दिन में, बिना किसी कारण बताओ नोटिस के, कुछ मनगढ़ंत तकनीकी दलीलों के आधार पर रातों-रात लाइसेंस रद्द करना, सत्ता का दुरुपयोग करने के अलावा और कुछ नहीं है।'' समूह ने कहा, ‘‘आप का बयान पूरी तरह गलत है, क्योंकि अगर चिंता पर्यावरण की है, तो न तो अखबार की छपाई और न ही होटल कोई स्वाभाविक रूप से प्रदूषण फैलाने वाला उद्यम है।''

इसने कहा, ‘‘पंजाब केसरी समूह हमेशा सबसे बेहतर तरीकों से व्यापार करने की कोशिश करता है, लेकिन अगर किसी सुधार की जरूरत है, तो वह किया जा सकता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बिना सुनवाई का नोटिस दिए रातों-रात बंद करने के ऑर्डर जारी करने की क्या जरूरत थी?'' शिरोमणि अकाली दल ने राज्यपाल से ‘‘प्रेस की स्वतंत्रता पर हमले को रोकने'' के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है, जबकि भाजपा की पंजाब इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने सरकार की इस कार्रवाई को ‘‘लोकतंत्र पर सीधा हमला'' बताया है।

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