माओ के बाद जिनपिंग चला रहे चीन में सबसे बड़ा ‘लापता अभियान’

Edited By Updated: 25 Sep, 2023 04:53 AM

after mao jinping is running the biggest  disappearance campaign  in china

हाल ही के महीनों में चीन के कई बड़े अधिकारियों के अचानक लापता होने की घटनाओं ने इन अटकलों को तेज कर दिया है कि क्या चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने देश में ‘राजनीतिक सफाई अभियान’ शुरू कर दिया है जिसमें विशेष रूप से सेना से जुड़े लोग शामिल हैं।

हाल ही के महीनों में चीन के कई बड़े अधिकारियों के अचानक लापता होने की घटनाओं ने इन अटकलों को तेज कर दिया है कि क्या चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने देश में ‘राजनीतिक सफाई अभियान’ शुरू कर दिया है जिसमें विशेष रूप से सेना से जुड़े लोग शामिल हैं। जुलाई महीने में विदेश मंत्री शिन गांग बर्खास्त किए जाने के बाद गायब हो गया था। शिन गांग के विरुद्ध अमरीका में उसके अफेयर, जिससे उसका एक बच्चा भी हुआ बताया जाता है, की जांच की जा रही है क्योंकि यह बच्चा एक प्रतिद्वंद्वी देश की नागरिक से हुआ है। चीन के उच्चाधिकारियों से अपमानित होकर लापता होने का ताजा उदाहरण कई महीनों से गायब रक्षा मंत्री जनरल ली शांगफू हैं। जनरल शांगफू के पास पहले पी.एल.ए. के लिए सैन्य सामान खरीदने की जिम्मेदारी थी जिसमें भ्रष्टाचार को लेकर जांच चल रही है। 

अभी कुछ सप्ताह पहले ही एटमी मिसाइलों की जिम्मेदारी संभालने वाली राकेट फोर्स के 2 उच्चाधिकारियों और एक सैन्य अदालत के जज को उनके पद से हटा दिया गया था और वह तब से लापता है। अब देश के सैन्य बल को नियंत्रित करने वाली चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सी.पी.सी.) के केंद्रीय सैन्य आयोग के कुछ उच्चाधिकारियों के विरुद्ध भी जांच जारी है। हालांकि सरकार ने स्वास्थ्य कारणों के अलावा उक्त अधिकारियों की बर्खास्तगी का कोई कारण नहीं बताया है। सी.पी.सी. के अनुसार चीन सरकार पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पी.एल.ए.) में भ्रष्टाचार के विरुद्ध अभियान चला रही है। 

चीन सरकार अपनी सेनाओं पर एक खरब युआन की भारी भरकम रकम खर्च करती है जिसका एक बड़ा हिस्सा सैन्य सामग्री खरीदने में खर्च किया जाता है। चीन की सेना में भ्रष्टाचार एक बड़ी चुनौती रहा है। इस समय जबकि चीन अमरीका के साथ अपने जटिल संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है, उसके बड़े अधिकारियों के अचानक इस तरह लापता होने को कम्युनिस्ट पार्टी में बढ़ रहे भय के रूप में देखा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि जुलाई महीने में अपने यहां जासूसी रोकने के लिए चीन ने एक व्यापक कानून लागू किया था जिसके बाद उसके स्टेट सिक्योरिटी मंत्रालय ने आम लोगों से सार्वजनिक रूप से अपील की थी कि वे देश के भीतर जासूसी गतिविधियों का मुकाबला करने में सरकार की मदद करें। 

यह भी चर्चा है कि कोविड-19 के बाद चीन की अर्थव्यवस्था डावांडोल होने और बेरोजगारी लगातार बढऩे से सी.पी.सी. के अंदरुनी दबाव के कारण जिनपिंग यह सफाई अभियान ध्यान बंटाने के लिए चला रहे हैं। आर्थिक तौर पर समृद्ध समझे जाने वाले उद्योगपतियों पर नियंत्रण से ज्यादा शी जिनपिंग सरकार में ऐसे लोगों को भी मिटाना चाहते हैं जो चीन में भविष्य में शक्तिशाली स्थान बना सकते हैं। एक के बाद एक बड़े मंत्रियों का लापता होना जिनपिंग के नेतृत्व की अस्थिरता और उनमें व्याप्त असुरक्षा की भावना का भी संकेत है जो उनकी निर्णय क्षमता पर भी सवाल खड़े करता है।यदि इसे ‘राजनीतिक सफाई अभियान’ के तौर पर देखें तो इससे भी जिनपिंग की नेतृत्व क्षमता सवालों के घेरे में आ जाती है क्योंकि जिनपिंग ने अभी पिछले वर्ष ही पार्टी कांग्रेस में अपनी ताकत बढ़ाते हुए संभावित प्रतिद्वंद्वियों को किनारे लगा दिया था और देश चलाने वाली सभी महत्वपूर्ण समितियों में अपने वफादार भर दिए थे। 

इस संबंध में दूसरा दृष्टिकोण यह है कि यह सफाई अभियान जिनपिंग का शक्ति प्रदर्शन ही है और ऐसा भी कहा जा रहा है कि यह सब उनकी असुरक्षा की मनोस्थिति को दर्शाता है। वह खुद भी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के एक ऐसे अधिकारी के बेटे हैं जिन्हें सफाई अभियान के अंतर्गत हटाया गया था। चेयरमैन माओ त्से तुंग के बाद चीन के किसी अन्य नेता ने इतने बड़े पैमाने पर राजनीतिक सफाई अभियान नहीं चलाया जितने बड़े पैमाने पर जिनपिंग चला रहे हैं। हालांकि देखने में राजनीतिक सफाई अभियान से ज्यादा जिनपिंग का यह ‘लापता अभियान’ नजर आता है। पिछले कई वर्षों के दौरान जिनपिंग ने हजारों पार्टी नेताओं के विरुद्ध कार्रवाई की है और उनके भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के निशाने पर बड़े अधिकारियों के साथ निचले स्तर के कर्मचारी भी रहे हैं। इस संबंध में कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े अधिकारियों की गुमशुदगी का जिनपिंग के नेतृत्व और चीन की स्थिरता पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।

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