बच्चे क्यों हो रहे हैं लंग कैंसर के शिकार, जानें इसकी पीछे की बड़ी वजह

Edited By Updated: 13 Jan, 2026 06:12 PM

why are children falling victim to lung cancer know the major reasons behind it

बच्चों और नॉन-स्मोकर्स में लंग कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जबकि आम धारणा इसे सिर्फ धूम्रपान से जोड़ती है। इसके पीछे पैसिव स्मोकिंग, बढ़ता वायु प्रदूषण, रेडॉन गैस, जेनेटिक म्यूटेशन और हार्मोनल बदलाव जैसी वजहें होती हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है...

नेशनल डेस्क : आमतौर पर लोग लंग कैंसर को सिगरेट और धूम्रपान से जोड़कर देखते हैं, लेकिन यह पूरी सच्चाई नहीं है। मेडिकल जर्नल्स के अनुसार करीब 25% लंग कैंसर के मरीज ऐसे होते हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। बच्चों और नॉन-स्मोकर्स में भी यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। जानिए ऐसे कौन-कौन से कारण हैं जो धूम्रपान न करने वाले लोगों को भी लंग कैंसर के खतरे में डाल सकते हैं।

1. पैसिव स्मोकिंग

भले ही बच्चे या नॉन-स्मोकर्स सिगरेट न पीते हों, लेकिन अगर वे धूम्रपान करने वालों के आसपास रहते हैं, तो उन्हें पैसिव स्मोकिंग का खतरा रहता है। घर या सार्वजनिक स्थानों पर धुएं के संपर्क में आने से फेफड़ों को गंभीर नुकसान हो सकता है। सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार पैसिव स्मोकिंग से नॉन-स्मोकर्स में लंग कैंसर का खतरा 20 से 30% तक बढ़ जाता है।

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2. हवा में बढ़ता प्रदूषण

शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में एयर पॉल्यूशन भी लंग कैंसर का बड़ा कारण बन रहा है। गाड़ियों का धुआं, फैक्ट्रियों से निकलने वाले जहरीले कण और निर्माण कार्य से उठती धूल फेफड़ों तक पहुंचती है। लंबे समय तक इस जहरीली हवा में सांस लेने से कोशिकाओं में बदलाव आते हैं, जो कैंसर का कारण बन सकते हैं।

3. जेनेटिक बदलाव

कुछ मामलों में लंग कैंसर जेनेटिक कारणों से भी होता है। बच्चों में पाए जाने वाले जीन म्यूटेशन जैसे EGFR सेल्स को तेजी से बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। जिन परिवारों में पहले कैंसर का इतिहास रहा हो, वहां जोखिम और बढ़ जाता है।

4. रेडॉन गैस का खतरा

रेडॉन एक रेडियोएक्टिव गैस है जो जमीन और चट्टानों से निकलती है। खराब वेंटिलेशन वाले घरों में यह जमा हो सकती है। यह न दिखाई देती है और न ही इसकी कोई गंध होती है, लेकिन लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से नॉन-स्मोकर्स में भी लंग कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

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5. हार्मोनल कारण

कुछ रिसर्च में यह पाया गया है कि हार्मोनल बदलाव भी लंग कैंसर के खतरे को प्रभावित कर सकते हैं। खासतौर पर लड़कियों में हार्मोन से जुड़ी कुछ स्थितियां कैंसर सेल्स की ग्रोथ को बढ़ावा दे सकती हैं। हालांकि इस क्षेत्र में और रिसर्च की जरूरत है।

एक्सपर्ट की सलाह

कैंसर इम्यूनोथेरेपी के एक्सपर्ट और कैंसर हीलर सेंटर के डायरेक्टर डॉ. तरंग कृष्णा ने बताया कि लंग कैंसर सबसे जानलेवा कैंसरों में शामिल है। अक्सर इसका पता काफी देर से चलता है। उन्होंने कहा कि शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि समय पर पहचान होने पर इलाज आसान और प्रभावी हो सकता है।

शोध और स्टडीज

2022 में प्रकाशित लैंसेट स्टडी में पाया गया कि लंबे समय तक PM2.5 जैसे बारीक प्रदूषक कणों के संपर्क में रहने से नॉन-स्मोकर्स में नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। यह खासकर शहरी और औद्योगिक इलाकों में देखने को मिला। भारत के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, बेंगलुरु और नोएडा में वायु प्रदूषण का स्तर WHO के तय मानकों से कई गुना ज्यादा हो चुका है। लगातार जहरीली हवा में सांस लेने से फेफड़ों को गंभीर खतरा है।

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