वी.बी. जी राम जी : गांधी जी के सपनों के भारत का निर्माण

Edited By Updated: 28 Jan, 2026 05:58 AM

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हाल ही में, संसद में विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वी.बी. जी राम जी) पर बोलते हुए मैंने स्पष्ट रूप से कहा था कि ‘यह गरीबों का सफाया नहीं, बल्कि परजीवियों का सफाया है’ और मेरा यह बयान न तो कोई अतिशयोक्ति था और न ही राजनीतिक उकसावा।

हाल ही में, संसद में विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वी.बी. जी राम जी) पर बोलते हुए मैंने स्पष्ट रूप से कहा था कि ‘यह गरीबों का सफाया नहीं, बल्कि परजीवियों का सफाया है’ और मेरा यह बयान न तो कोई अतिशयोक्ति था और न ही राजनीतिक उकसावा। कई राज्यों में ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना फर्जी और डुप्लीकेट जॉब कार्डों, अदृश्य लाभार्थियों और संगठित धांधली से कमजोर हो गई थी। संगठित रूप से भ्रष्टाचार का अड्डा बनी मनरेगा योजना का वास्तविक रूप से जिन्हें लाभ मिलना चाहिए था, उससे उन्हें दूर कर दिया गया। इन परजीवियों, भ्रष्ट तत्वों ने मनरेगा को भ्रष्टाचार के केंद्र में बदल दिया और कमजोर वर्गों के लिए निर्धारित संसाधनों को चूस लिया।

जैसा कि हमने देखा कि पश्चिम बंगाल में मनरेगा के तहत 25 लाख फर्जी जॉब कार्डों के आरोप सामने आए, जिसमें बड़े पैमाने पर घोटाले की बू आई, जिसने गरीबों के लिए निर्धारित सार्वजनिक संसाधनों को हड़पने का काम किया। जब प्रशासन ने आधार सीडिंग और सत्यापन प्रक्रियाओं को शुरू किया, तो इस बड़े पैमाने पर चल रहे भ्रष्टाचार को छिपाना असंभव हो गया। भारत भर में हाल के वर्षों में 10 लाख से अधिक ऐसे धोखाधड़ी वाले कार्ड्स हटाए गए हैं। वी.बी.जी राम जी अधिनियम इस गति पर आधारित है, जिसमें बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण और रीयल-टाइम डिजिटल ट्रैकिंग के माध्यम से सख्त सत्यापन को अनिवार्य किया गया है, ताकि भ्रष्टाचार व अनियमितता को जड़ से खत्म किया जा सके। 

यह जिम्मेदारी से पीछे हटने की नहीं, बल्कि राज्यों से समान भागीदारी लाकर स्वामित्व और भ्रष्टाचार के खिलाफ सतर्कता को बढ़ावा देने के बारे में है। यह बोझ डालने की बात नहीं, यह जवाबदेही के साथ बोझ सांझा करने की बात है। जब राज्य सीधे ग्रामीण रोजगार सृजन और संपत्ति विकास में निवेश करते हैं, तो उनके पास उचित क्रियान्वयन सुनिश्चित करने, अदृश्य श्रमिकों को समाप्त करने और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में मनरेगा की विश्वसनीयता को नष्ट करने वाली बड़े पैमाने की धोखाधड़ी को रोकने की व्यवस्था, प्रेरणा व संसाधन होते हैं। यह सहकारी संघवाद का सच्चा प्रतीक है, जिसे मोदी सरकार 2014 से लगातार समर्थन दे रही है।

हमारी सरकार ने कभी भी मनरेगा को नजरअंदाज नहीं किया। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार मनरेगा में मूलभूत सुधार लाने व मनरेगा के ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से  विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 लेकर आई। यह नया कानून न केवल ग्रामीण परिवारों को अधिक दिनों के रोजगार की गारंटी देता है, बल्कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में भी यह सहायक होगा। जी राम जी का उद्देश्य लंबे समय से चली आ रही बिखरी हुई व्यवस्था और नीतिगत गतिरोध को समाप्त करना है। यह बिल पुराने बिखरे हुए नियमों को निरस्त कर उनकी जगह लाइसैंसिंग, सुरक्षा, अप्रूवल, जवाबदेही और मुआवजे को कवर करने वाला एक फ्रेमवर्क लागू करता है। मनरेगा के तहत 2014-2025 के दशक में लगभग 8.07 करोड़ स्थायी संपत्तियां बनाई गईं, वी.बी. जी राम जी इन संपत्तियों को एकीकृत विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक में शामिल करता है, जिससे प्रत्येक गारंटीड कार्य दिवस न केवल तत्काल मजदूरी देता है, बल्कि गांव के परिवर्तन में योगदान देता है। यह गांधी जी के उस दृष्टिकोण को पूरा करता है जिसमें गांव स्वावलंबी, लचीली इकाइयां हों, जो जीवन की आवश्यकताओं का स्थानीय उत्पादन करें और आधुनिक अवसंरचना से समॢथत हों।

मनरेगा के एडहॉक प्रोजैक्ट्स के विपरीत, वी.बी. जी राम जी ग्राम पंचायत स्तर पर भागीदारीपूर्ण योजना को संस्थागत बनाता है, जिससे घरेलू भागीदारी बढ़ती है और अतिरिक्त राजकोषीय स्थान से अनुमानित 30,000 करोड़ रुपए वार्षिक ग्रामीण उपभोग में वृद्धि होती है। इसके अलावा, यदि 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध नहीं कराया गया तो अनिवार्य बेरोजगारी भत्ता लागू होता है, जो मनरेगा में नहीं था। वी.बी.जी राम जी का पारित होना महात्मा गांधी की विरासत को कमजोर करने से कोई संबंध नहीं रखता। रोजगार गारंटी जैसी योजना तो 80 के दशक से चल रही है। कांग्रेस ने पहले 1989 में इसका नाम जवाहर रोजगार योजना रखा, फिर 1999 में इसका नाम जवाहर रोजगार समृद्धि योजना रखा, 2001 में सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना, तो 2005 में नरेगा रखा, इन्हें तब गांधी जी याद नहीं आए। 2009 का चुनाव आते-आते कांग्रेस को बापू याद आए और योजना का नाम मनरेगा किया। मनरेगा का नाम पहले महात्मा गांधी के नाम पर नहीं रखा गया। वो तो पहले नरेगा थी। कांग्रेस पार्टी का ‘बापू प्रेम’ बस दिखावा है और इन्होंने गांधी जी के नाम का इस्तेमाल सिर्फ राजनीति के लिए किया है। 
आगे देखें तो वी.बी. जी राम जी विकसित भारत/2047 का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

2047 तक यह अधिनियम ग्रामीण भारत को केवल परिधीय अर्थव्यवस्था के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास का इंजन बनाना चाहता है।  यह अमृत काल के लक्ष्यों के साथ एकीकृत है, जिसमें रोजगार को पी.एम.के.वी.वाई. के तहत कौशल विकास, पी.एम. किसान के माध्यम से कृषि आधुनिकीकरण और जल जीवन मिशन के जरिए अवसंरचना वृद्धि के साथ जोड़ा गया है। वी.बी. जी राम जी केवल एक नीति नही, यह हर मेहनतकश किसान और कारीगर से एक वादा है कि उनकी पसीने की कमाई न केवल सड़कें और जलाशय बनाएगी, बल्कि एक समृद्ध, स्वावलंबी भविष्य का भी निर्माण करेगी।-अनुराग ठाकुर(सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री)

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