Gold-Silver के बाद अब Copper पर निवेशकों की नजर, कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर, क्या है तेजी के कारण?

Edited By Updated: 10 Jan, 2026 06:16 PM

after gold and silver investors are now focusing on copper prices record level

सोना और चांदी में रिकॉर्ड तेजी के बाद अब निवेशकों की नजर कॉपर (तांबा) पर टिकने लगी है। शेयर बाजार की सुस्ती और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कमोडिटी निवेश एक बार फिर चर्चा में है। गोल्ड और सिल्वर में जबरदस्त रिटर्न के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या...

बिजनेस डेस्कः सोना और चांदी में रिकॉर्ड तेजी के बाद अब निवेशकों की नजर कॉपर (तांबा) पर टिकने लगी है। शेयर बाजार की सुस्ती और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कमोडिटी निवेश एक बार फिर चर्चा में है। गोल्ड और सिल्वर में जबरदस्त रिटर्न के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या कॉपर अगला बड़ा दांव साबित हो सकता है और क्या रिटेल निवेशकों के लिए इसमें निवेश का कोई रास्ता है।

गोल्ड-सिल्वर की रैली के बाद क्यों चर्चा में कॉपर?

बीते एक साल में गोल्ड और सिल्वर ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिए हैं। AMFI के आंकड़ों के मुताबिक, ETF और म्यूचुअल फंड के जरिए इन दोनों धातुओं में निवेश में तेज बढ़ोतरी हुई है। अब जबकि सोना-चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं, निवेशक अगली संभावित तेजी वाली कमोडिटी की तलाश में हैं और इसी वजह से कॉपर सुर्खियों में आ गया है।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं कॉपर की कीमतें

लंबे समय तक नजरअंदाज रहने के बाद अब कॉपर में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) के मुताबिक, कॉपर मार्च 2022 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है।

अमेरिकी कमोडिटी एक्सचेंज COMEX पर 6 जनवरी 2026 को कॉपर ने $6.069 प्रति पाउंड का ऑल-टाइम हाई बनाया, जो एक साल पहले के मुकाबले करीब 60% की बढ़त दिखाता है। 10 जनवरी को हल्की मुनाफावसूली के बाद यह करीब $5.85 प्रति पाउंड के आसपास कारोबार करता दिखा।

भारत में MCX पर कॉपर फ्यूचर्स ने भी बीते एक साल में करीब 36% की तेजी दिखाई है, जिससे यह सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली कमोडिटीज में शामिल हो गया है।

तेजी के पीछे क्या हैं बड़े कारण?

विशेषज्ञों के मुताबिक कॉपर की कीमतों को कई मजबूत फैक्टर सपोर्ट कर रहे हैं।

  • इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर का तेजी से विस्तार
  • डेटा सेंटर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग
  • डिफेंस सेक्टर में मजबूत खपत
  • सबसे अहम, कॉपर की सीमित वैश्विक सप्लाई

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, “कॉपर की तेजी इस बात का संकेत है कि सप्लाई सीमित है, जबकि इलेक्ट्रिफिकेशन से जुड़ी मांग लगातार बढ़ रही है। कमजोर डॉलर और नरम ब्याज दरों की उम्मीदों ने भी निवेशकों को जोखिम लेने के लिए प्रोत्साहित किया है।”

ब्रोकरेज रिपोर्ट्स बताती हैं कि अमेरिका के पास भले ही अतिरिक्त कॉपर स्टॉक मौजूद हो, लेकिन दुनिया के कई हिस्सों में इसकी कमी बनी हुई है, जिससे कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बना हुआ है।

क्या रिटेल निवेशक कॉपर में निवेश कर सकते हैं?

फिलहाल इसका जवाब है—सीधे तौर पर नहीं। भारत में अभी कॉपर ETF या कॉपर म्यूचुअल फंड उपलब्ध नहीं हैं और न ही फिजिकल कॉपर बार या कॉइन में निवेश का कोई संगठित विकल्प मौजूद है।

रिटेल निवेशकों के लिए फिलहाल एकमात्र रास्ता कॉपर फ्यूचर्स है, जिसकी ट्रेडिंग MCX पर होती है। हालांकि यह रास्ता काफी जोखिम भरा है। एक कॉपर फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट 2.5 टन का होता है, जिससे निवेश का एक्सपोजर काफी बड़ा हो जाता है। तेज उतार-चढ़ाव के कारण मुनाफे के साथ-साथ नुकसान की आशंका भी उतनी ही ज्यादा रहती है।

 

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