Edited By jyoti choudhary,Updated: 21 Jan, 2026 11:56 AM

देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए साल 2026 की शुरुआत कुछ खास अच्छी नहीं रही है। जनवरी महीने में कंपनी के शेयरों में करीब 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहले जनवरी में इतनी बड़ी गिरावट आखिरी...
बिजनेस डेस्कः देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए साल 2026 की शुरुआत कुछ खास अच्छी नहीं रही है। जनवरी महीने में कंपनी के शेयरों में करीब 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहले जनवरी में इतनी बड़ी गिरावट आखिरी बार 2011 में देखी गई थी।
करीब 19.12 लाख करोड़ रुपए के मार्केट कैप वाली रिलायंस के शेयरों में आई इस गिरावट का असर सीधे निफ्टी 50 पर भी पड़ा है, जो अब तक करीब 2 फीसदी फिसल चुका है। कंपनी के उम्मीद से कमजोर तिमाही नतीजों के बाद शेयरों में एक ही दिन में 3 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली।
जियोपॉलिटिक्स और रिफाइनिंग बिजनेस बना सिरदर्द
विशेषज्ञों के मुताबिक, रिलायंस के रिफाइनिंग कारोबार पर भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर पड़ा है। रूस से कच्चे तेल की सप्लाई घटने और फ्रेट कॉस्ट बढ़ने से कंपनी के ऑयल-टू-केमिकल बिजनेस पर दबाव बढ़ा है।
ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के अनुसार, पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते रिलायंस ने दिसंबर में रूस से तेल आयात में 32.4 फीसदी की कटौती की, जो फरवरी 2024 के बाद सबसे निचला स्तर है। जनवरी में भी रूसी तेल आयात कम रहने की संभावना जताई गई है।
हालांकि, कंपनी वेनेजुएला से तेल आयात दोबारा शुरू करने पर अमेरिका से बातचीत कर रही है, जिससे रूसी तेल की कमी की भरपाई हो सकती है।
रिटेल बिजनेस बना कमजोर कड़ी
जहां एक ओर रिफाइनिंग और फ्यूल बिजनेस में वॉल्यूम ग्रोथ और बेहतर फ्यूल क्रैक्स से कुछ राहत मिली है, वहीं रिलायंस का रिटेल कारोबार कंपनी की कमजोर कड़ी बनकर उभरा है।
रिलायंस रिटेल की नेट रेवेन्यू ग्रोथ सिर्फ 9 फीसदी रही, जबकि उसकी प्रतिद्वंद्वी एवेन्यू सुपरमार्ट्स (DMart) ने 13 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की। कंपनी ने इसके लिए त्योहारों की तारीखों में बदलाव और कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिवीजन के डिमर्जर को जिम्मेदार ठहराया है।
त्योहारी सीजन में भारी छूट और क्विक कॉमर्स में किए गए निवेश के चलते मार्जिन पर भी दबाव पड़ा है।
क्विक कॉमर्स: मौका भी, जोखिम भी
भारत में तेजी से बदलते उपभोक्ता व्यवहार के बीच अब ध्यान पारंपरिक दुकानों से ऑनलाइन और फिर क्विक कॉमर्स की ओर शिफ्ट हो रहा है। 10 मिनट में डिलीवरी वाले इस मॉडल में जहां बड़े मौके हैं, वहीं जोखिम भी कम नहीं हैं।
हाल ही में जोमैटो, स्विगी और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म्स की तेज डिलीवरी मॉडल को लेकर आलोचना भी हुई है। हालांकि रिलायंस का दावा है कि उसका क्विक कॉमर्स बिजनेस पहले से ही मुनाफे में है और उसके पास मजबूत ओम्नी-चैनल नेटवर्क की बढ़त है।
Jio IPO की आहट, निवेशकों को उम्मीद
हालांकि रिटेल बिजनेस की लिस्टिंग अभी दूर लगती है लेकिन टेलीकॉम यूनिट जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ का रास्ता साफ होता दिख रहा है। सरकार ने न्यूनतम 2.5 फीसदी हिस्सेदारी के सार्वजनिक निर्गम को हरी झंडी दे दी है।
विश्लेषकों का मानना है कि तमाम चुनौतियों के बावजूद रिलायंस के शेयरों में आगे तेजी की गुंजाइश बनी हुई है। LSEG के आंकड़ों के मुताबिक, 34 में से सिर्फ 2 एनालिस्ट ने शेयर को ‘सेल’ रेटिंग दी है। शेयर