Edited By jyoti choudhary,Updated: 27 Feb, 2026 01:30 PM

शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए बड़ी चेतावनी जारी की गई है। बाजार नियामक Securities and Exchange Board of India (सेबी) ने निवेशकों को आगाह किया है कि उसके नाम पर भेजे जा रहे फर्जी नोटिसों से सतर्क रहें।
बिजनेस डेस्कः शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए बड़ी चेतावनी जारी की गई है। बाजार नियामक Securities and Exchange Board of India (सेबी) ने निवेशकों को आगाह किया है कि उसके नाम पर भेजे जा रहे फर्जी नोटिसों से सतर्क रहें।
सेबी के मुताबिक, कुछ जालसाज उसके लेटरहेड और प्रतीक चिन्ह का दुरुपयोग कर नकली नोटिस जारी कर रहे हैं, जिनमें प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) के भुगतान की मांग की जा रही है। नियामक ने साफ किया है कि ऐसे नोटिस उसने जारी नहीं किए हैं और निवेशक किसी भी तरह का भुगतान करने से पहले उनकी प्रामाणिकता अवश्य जांच लें।
क्या है मामला?
सेबी ने बताया कि धोखेबाज वित्त अधिनियम, 2004 के तहत STT अनुपालन के नाम पर नोटिस भेज रहे हैं। इनमें निवेशकों से कथित बकाया राशि जमा करने को कहा जाता है।
नियामक ने स्पष्ट किया कि शेयर बाजार में होने वाले प्रत्येक खरीद और बिक्री लेनदेन पर STT स्वतः लागू होता है और इसे ब्रोकर द्वारा ही एकत्र किया जाता है। सेबी खुद STT वसूली के लिए अलग से नोटिस जारी नहीं करता और न ही इस संबंध में Reserve Bank of India (आरबीआई) के साथ कोई समन्वय करता है।
कैसे हो रहा है फर्जीवाड़ा?
सेबी के अनुसार, कुछ लोग उसके अधिकारियों की पहचान की नकल कर रहे हैं और जाली पत्र, ईमेल या नोटिस के जरिए निवेशकों को पैसे ट्रांसफर करने के लिए कह रहे हैं। इन फर्जी खातों में राशि जमा कराने से निवेशकों को वित्तीय नुकसान हो रहा है।
निवेशकों से अपील की गई है कि सेबी के नाम पर आने वाले किसी भी पत्र या भुगतान मांग की जानकारी को आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित स्रोतों से सत्यापित करें।
‘गारंटीड मुनाफे’ के झांसे से बचें
नियामक ने उन संस्थाओं और व्यक्तियों से भी सावधान रहने को कहा है, जो खुद को खाता संचालक या फंड मैनेजर बताकर जोखिम-मुक्त मुनाफे का दावा करते हैं। ये लोग अक्सर निवेशकों से ट्रेडिंग खाते की जानकारी मांगते हैं और मुनाफे में हिस्सेदारी लेने की बात करते हैं।
सेबी ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में यदि नुकसान होता है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी निवेशक पर ही आती है। इसलिए किसी भी “गारंटीड रिटर्न” के वादे पर भरोसा करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करना जरूरी है।