क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के नियमों में बदलाव, SEBI ने किया बड़ा ऐलान

Edited By Updated: 09 Jan, 2025 11:39 AM

changes in the rules of credit rating agencies sebi made a big announcement

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों (CRA) के लिए महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए रेटिंग एक्शन की समयसीमा को अब कैलेंडर डे के बजाय वर्किंग डे के आधार पर निर्धारित किया है। यह घोषणा 8 जनवरी को की गई। सेबी ने यह फैसला CRA पर...

बिजनेस डेस्कः भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों (CRA) के लिए महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए रेटिंग एक्शन की समयसीमा को अब कैलेंडर डे के बजाय वर्किंग डे के आधार पर निर्धारित किया है। यह घोषणा 8 जनवरी को की गई। सेबी ने यह फैसला CRA पर गठित वर्किंग ग्रुप की सिफारिशों के बाद किया, जिससे एजेंसियों को वीकेंड और छुट्टियों के दौरान काम में आने वाली दिक्कतों से राहत मिलेगी।

नए नियमों से सीआरए के कामकाज में लचीलापन आएगा और कारोबारी सुगमता को बढ़ावा मिलेगा। इससे बैंकों और डिबेंचर ट्रस्टी जैसे संस्थानों के साथ बेहतर तालमेल बैठाने में मदद मिलेगी। SEBI का यह कदम रेटिंग प्रक्रिया को अधिक व्यवहारिक और एजेंसियों के लिए अनुकूल बनाने की दिशा में है।

क्या बदले हैं नियम?

प्रेस स्टेटमेंट जारी करने की समयसीमा

किसी घटना के बाद रेटिंग कार्रवाई को लेकर प्रेस स्टेटमेंट अब 7 कार्य दिवसों में जारी करना होगा। पहले यह समयसीमा 7 कैलेंडर दिनों की थी।

ब्याज या मूलधन में देरी की स्थिति

यदि ब्याज या मूलधन के भुगतान में देरी होती है, तो सीआरए को रेटिंग की समीक्षा करनी होगी। इस मामले में प्रेस रिलीज अब 2 कार्य दिवसों के भीतर जारी करनी होगी। पहले यह समयसीमा 2 कैलेंडर दिनों की थी।

No Default Statement (NDS)

लगातार 3 महीने तक एनडीएस या डिबेंचर ट्रस्टी की ओर से डेट सर्विसिंग की पुष्टि न मिलने पर, रेटिंग को ‘जारीकर्ता सहयोग नहीं कर रहा’ के रूप में चिह्नित करने की समयसीमा भी 7 कैलेंडर दिनों से घटाकर 5 कार्य दिवस कर दी गई है।

क्यों है यह बदलाव जरूरी?

यह कदम क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के कामकाज को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए उठाया गया है। अब एजेंसियों को छुट्टियों या वीकेंड की चिंता किए बिना नियमों का पालन करना आसान होगा।

सेबी के इस फैसले से रेटिंग एजेंसियों के लिए समीक्षा और फैसले जारी करना आसान होगा। खासतौर पर जब लगातार छुट्टियां होती हैं, तब भी एजेंसियों को काम के लिए पूरा समय मिल सकेगा।
 

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