Edited By jyoti choudhary,Updated: 14 Mar, 2026 05:22 PM

वैश्विक स्तर पर बढ़ते जियो-पॉलिटिकल तनाव के बीच शेयर बाजार में इन दिनों तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इस स्थिति को लेकर Tuhin Kanta Pandey, जो Securities and Exchange Board of India (SEBI) के चेयरमैन हैं, ने छोटे निवेशकों को घबराने से बचने और...
बिजनेस डेस्कः वैश्विक स्तर पर बढ़ते जियो-पॉलिटिकल तनाव के बीच शेयर बाजार में इन दिनों तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इस स्थिति को लेकर Tuhin Kanta Pandey, जो Securities and Exchange Board of India (SEBI) के चेयरमैन हैं, ने छोटे निवेशकों को घबराने से बचने और धैर्य बनाए रखने की सलाह दी है। उनका कहना है कि बाजार में आने वाली ऐसी अस्थिरता आम तौर पर ज्यादा समय तक नहीं रहती और वैश्विक स्तर पर स्थिरता बहाल करने के प्रयास लगातार जारी रहते हैं।
हाल ही में एक कार्यक्रम में बोलते हुए पांडे ने कहा कि पिछले दस वर्षों में भारत के कैपिटल मार्केट काफी बड़े और मजबूत हुए हैं। इसी वजह से अब भारतीय बाजार वैश्विक घटनाओं से पहले की तुलना में अधिक जुड़ गए हैं और किसी भी अंतरराष्ट्रीय घटना या खबर का असर तुरंत देखने को मिलता है। जियो-पॉलिटिकल तनाव, युद्ध या वैश्विक अनिश्चितता के समय बाजार में अस्थिरता बढ़ना सामान्य बात है।
उन्होंने कहा कि बाजार की असली मजबूती का पता ऐसे ही समय में चलता है, जब उतार-चढ़ाव के बावजूद ट्रेडिंग, सेटलमेंट और अन्य प्रक्रियाएं सुचारू रूप से चलती रहती हैं। पांडे के मुताबिक भारत का बाजार इस कसौटी पर खरा उतर रहा है और इसकी बुनियादी संरचना मजबूत है।
SEBI चेयरमैन ने खास तौर पर छोटे निवेशकों को सलाह दी कि वे घबराकर अपने निवेश से बाहर न निकलें और जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें। उन्होंने कहा कि बाजार की स्थिरता केवल नियमों से नहीं आती, बल्कि निवेशकों, ब्रोकरों, रेगुलेटर और सरकार सभी की साझा जिम्मेदारी से बनती है।
यह सलाह ऐसे समय में आई है जब वैश्विक तनाव के कारण कई निवेशक अपनी निवेश योजनाओं, खासकर SIP, को रोकने या पैसा निकालने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेश में ऐसे उतार-चढ़ाव सामान्य होते हैं और इतिहास गवाह है कि बड़े संकटों के बाद भी बाजार समय के साथ उबरता रहा है।
पांडे ने निवेशकों को सलाह दी कि वे अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई रखें, लंबी अवधि के लक्ष्यों पर ध्यान दें और बाजार की अस्थिरता को घबराहट की बजाय अवसर के रूप में देखें। उनका कहना है कि भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद लंबे समय में बाजार को समर्थन देती रहेगी।