Edited By jyoti choudhary,Updated: 31 Oct, 2026 01:39 PM

त्योहारों का मौसम शुरू हो चुका है। दशहरा, दीपावली और छठ को लेकर बाजारों में रौनक है और लोग तैयारियों में जुटे हैं लेकिन बढ़ती महंगाई ने त्योहारों की खुशियों पर असर डालना शुरू कर दिया है। खासतौर पर खाद्य तेलों की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम
नई दिल्लीः त्योहारों का मौसम शुरू हो चुका है। दशहरा, दीपावली और छठ को लेकर बाजारों में रौनक है और लोग तैयारियों में जुटे हैं लेकिन बढ़ती महंगाई ने त्योहारों की खुशियों पर असर डालना शुरू कर दिया है। खासतौर पर खाद्य तेलों की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। सरकार की ओर से खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में कटौती किए जाने के बावजूद उपभोक्ताओं को कीमतों में राहत नहीं मिली है।
पिछले एक साल के दौरान खाने के तेल की कीमतों में करीब 15 से 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सितंबर में ही रिफाइंड तेल लगभग 15 फीसदी और मूंगफली का तेल करीब 14 फीसदी महंगा हुआ। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है।
सरकार ने घटाई थी 5% ड्यूटी
खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों से उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार ने सितंबर में आयात शुल्क में 5 फीसदी की कटौती की थी। इसके तहत क्रूड पाम ऑयल और क्रूड सोयाबीन ऑयल पर ड्यूटी 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी गई थी। वहीं, क्रूड सनफ्लावर ऑयल पर आयात शुल्क शून्य कर दिया गया था। रिफाइंड खाद्य तेलों पर भी ड्यूटी में कटौती की गई थी।
सरकार का उद्देश्य आयात लागत कम करके घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों को नियंत्रित करना और ग्राहकों को राहत पहुंचाना था। इसके साथ ही कंपनियों को भी ड्यूटी में कटौती का फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए थे।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी के कारण घरेलू बाजार में इसका अपेक्षित असर दिखाई नहीं दिया। नतीजतन, त्योहारों के सीजन में भी लोगों को महंगे तेल खरीदने पड़ रहे हैं।
200 रुपए के पार पहुंचे कई खाद्य तेल
खाद्य तेलों की मौजूदा कीमतों पर नजर डालें तो कई तेल 200 रुपए प्रति लीटर के स्तर को पार कर चुके हैं। इससे रसोई का खर्च लगातार बढ़ रहा है।
खाद्य तेलों की कीमतें
खाद्य तेल कीमत (रुपए प्रति लीटर)
मूंगफली का तेल 231
सरसों का तेल 222
सनफ्लावर ऑयल 214
वनस्पति तेल 184
सोया ऑयल 180
पाम ऑयल 165
मूंगफली और सरसों के तेल की कीमतें 200 रुपए से ऊपर पहुंचने से आम परिवारों का मासिक बजट प्रभावित हो रहा है। त्योहारों के दौरान खाद्य तेल की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में कीमतों में उछाल ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से बढ़ा आयात बिल
खाद्य तेलों की महंगाई के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी भी एक बड़ी वजह है। इसके अलावा रुपए की कमजोरी ने भारत के लिए खाद्य तेलों का आयात महंगा कर दिया है।
आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष के शुरुआती छह महीनों में भारत को खाद्य तेलों के आयात पर करीब 87,000 करोड़ रुपए खर्च करने पड़े। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा लगभग 73,000 करोड़ रुपए था यानी आयात बिल में करीब 14,000 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है।
भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव घरेलू बाजार को भी प्रभावित करता है।
फिलहाल राहत की उम्मीद कम
सरकार की ओर से आयात शुल्क में कटौती के बावजूद खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी और रुपये की कमजोरी के चलते आयात लागत ऊंची बनी हुई है। ऐसे में फिलहाल उपभोक्ताओं को खाद्य तेलों की कीमतों में जल्द राहत मिलने की उम्मीद कम है। त्योहारों के बीच महंगे तेल आम लोगों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं।