Goldman Sachs on Gold: कॉपर-लिथियम की चाल अलग, सोने की तेजी पर Goldman Sachs की बड़ी रिपोर्ट

Edited By Updated: 19 Feb, 2026 06:27 PM

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वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि कॉपर और लिथियम जैसी कमोडिटीज सोने जैसी तेज और लगातार बढ़त नहीं दिखा पाएंगी। बैंक के मुताबिक, इन धातुओं का उत्पादन दुनिया भर में बढ़ने की संभावना है, जिससे कीमतों में बेकाबू उछाल पर लगाम लग सकती है,...

बिजनेस डेस्कः वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि कॉपर और लिथियम जैसी कमोडिटीज सोने जैसी तेज और लगातार बढ़त नहीं दिखा पाएंगी। बैंक के मुताबिक, इन धातुओं का उत्पादन दुनिया भर में बढ़ने की संभावना है, जिससे कीमतों में बेकाबू उछाल पर लगाम लग सकती है, भले ही कच्चे माल के बाजार में लंबी रैली की उम्मीद जताई जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव और नीतिगत अनिश्चितता के माहौल में सरकारें और निवेशक “सुरक्षित निवेश” के तौर पर सोने की ओर रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं।

हालांकि गोल्डमैन का कहना है कि कॉपर, शेल ऑयल और अन्य संसाधन सोने की राह पर नहीं चलेंगे। इसकी मुख्य वजह यह है कि इन बाजारों में सप्लाई तेजी से बढ़ाई जा सकती है। विश्लेषकों लीना थॉमस, डान स्ट्रूयवेन और सामंथा डार्ट के अनुसार, अन्य कमोडिटीज़ में मध्यम अवधि की कीमतों को सप्लाई ज्यादा प्रभावित करती है। खासकर अमेरिकी शेल ऑयल और गैस जैसे बाजारों में उत्पादन जल्दी बढ़ाया जा सकता है, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है।

सोने की कीमतों में बढ़ोतरी संभव 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सप्लाई सुरक्षा को मजबूत करने वाली नीतियां कुछ बाजारों में जरूरत से ज्यादा उत्पादन को बढ़ावा दे सकती हैं, जिससे कीमतों में अस्थिरता आ सकती है। गोल्डमैन का अनुमान है कि लंबी अवधि में सोने की कीमतों में और बढ़ोतरी संभव है लेकिन व्यापक कमोडिटी बाजार में रिटर्न अलग-अलग रहेंगे।

सोने की ऐतिहासिक तेजी

2023 के बाद से सोने की कीमतों में तेज उछाल आया है। केंद्रीय बैंकों की खरीद, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी डॉलर में उतार-चढ़ाव से बचाव की रणनीति ने इसे सहारा दिया है। 29 जनवरी को सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस के पार चला गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की धमकी दी थी। 2025 में सोने ने 65% की छलांग लगाई, जो 1979 के बाद सबसे बड़ी सालाना बढ़त है।

अन्य कमोडिटीज़ में भी तेजी

सोने के अलावा कॉपर और चांदी समेत कई धातुओं में भी हाल के महीनों में तेजी देखी गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से विस्तार के कारण डेटा सेंटर, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में निवेश बढ़ा है, जिससे औद्योगिक धातुओं की मांग मजबूत हुई है।

आईएमएफ के वर्ल्ड कमोडिटी प्राइस इंडेक्स में जनवरी में 5.24% की बढ़त दर्ज की गई, जो अगस्त 2022 के बाद सबसे बड़ी मासिक वृद्धि है।

HSBC का अनुमान है कि कमोडिटी बाजार “सुपर बुल” फेज में प्रवेश कर सकता है, जो एक साल से ज्यादा समय तक चल सकता है। बैंक ने 2026 में कुल कीमतों में 8% बढ़ोतरी का अनुमान जताया है।

हालांकि 30 जनवरी को सोना और चांदी में तेज गिरावट आई। यह तब हुआ जब खबर आई कि केविन वार्श फेडरल रिजर्व के अगले चेयरमैन बन सकते हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर में मई 2025 के बाद की सबसे बड़ी एक-दिवसीय तेजी आई।
 

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