Edited By jyoti choudhary,Updated: 23 Feb, 2026 11:02 AM

प्राइवेट सेक्टर के IDFC First Bank के शेयरधारकों के लिए 23 फरवरी का दिन बेहद खराब साबित हुआ। ₹590 करोड़ के कथित घोटाले के खुलासे के बाद बैंक का शेयर शुरुआती कारोबार में ही करीब 20% टूटकर बीएसई पर ₹66.85 तक आ गया। भारी बिकवाली के चलते बैंक का मार्केट...
बिजनेस डेस्कः प्राइवेट सेक्टर के IDFC First Bank के शेयरधारकों के लिए 23 फरवरी का दिन बेहद खराब साबित हुआ। ₹590 करोड़ के कथित घोटाले के खुलासे के बाद बैंक का शेयर शुरुआती कारोबार में ही करीब 20% टूटकर बीएसई पर ₹66.85 तक आ गया। भारी बिकवाली के चलते बैंक का मार्केट कैप घटकर लगभग ₹61,000 करोड़ रह गया।
क्या है पूरा मामला?
बैंक ने जानकारी दी है कि चंडीगढ़ स्थित एक ब्रांच में हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में कर्मचारियों और अन्य लोगों द्वारा कथित तौर पर ₹590 करोड़ की धोखाधड़ी की गई। बैंक ने इस मामले की सूचना बैंकिंग रेगुलेटर को दे दी है और पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है। फिलहाल बैंक ने फ्रॉड का अनुमानित आकार ₹590 करोड़ बताया है। अंतिम रकम आगे की जांच, क्लेम वैलिडेशन और संभावित रिकवरी के बाद तय होगी।
कैसे सामने आया फ्रॉड?
बैंक के मुताबिक, हरियाणा सरकार का एक विभाग IDFC फर्स्ट बैंक के साथ बैंकिंग कर रहा था। एक समय पर खाते को बंद कर बैलेंस दूसरी बैंक में ट्रांसफर करने का अनुरोध मिला। इस प्रक्रिया के दौरान अकाउंट बैलेंस और बताई गई रकम में अंतर पाया गया। बाद में हरियाणा सरकार की अन्य संस्थाओं के खातों में भी इसी तरह की गड़बड़ियां सामने आईं।
4 अधिकारी सस्पेंड, सख्त कार्रवाई का भरोसा
बैंक ने प्रारंभिक आंतरिक समीक्षा के बाद 4 अधिकारियों को जांच पूरी होने तक सस्पेंड कर दिया है। बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह मामला केवल चंडीगढ़ ब्रांच के सरकारी-लिंक्ड खातों तक सीमित है और अन्य ग्राहकों पर इसका असर नहीं पड़ा है। दोषियों के खिलाफ सिविल और क्रिमिनल कार्रवाई की जाएगी।
हरियाणा सरकार का बड़ा कदम
इस घटनाक्रम के बाद Government of Haryana ने तुरंत प्रभाव से IDFC फर्स्ट बैंक और AU Small Finance Bank को सरकारी कामकाज के लिए डी-एम्पेनल्ड कर दिया है। आधिकारिक सर्कुलर के अनुसार, राज्य सरकार अगली सूचना तक इन बैंकों में कोई फंड जमा नहीं करेगी और न ही इनके माध्यम से कोई वित्तीय लेनदेन करेगी।