Edited By jyoti choudhary,Updated: 21 Jan, 2026 02:58 PM

मोदी सरकार ने असंगठित और कम आय वर्ग के करोड़ों लोगों को बड़ी राहत देते हुए अटल पेंशन योजना (APY) को 2030-31 तक जारी रखने का फैसला किया है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी...
बिजनेस डेस्कः मोदी सरकार ने असंगठित और कम आय वर्ग के करोड़ों लोगों को बड़ी राहत देते हुए अटल पेंशन योजना (APY) को 2030-31 तक जारी रखने का फैसला किया है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस फैसले से उन कामगारों को सीधा फायदा मिलेगा, जिनके पास रिटायरमेंट के बाद नियमित आमदनी का कोई ठोस जरिया नहीं होता।
सरकारी सहयोग रहेगा जारी
कैबिनेट के फैसले के तहत अटल पेंशन योजना के लिए सरकार का सहयोग आगे भी जारी रहेगा। इसमें योजना के प्रचार-प्रसार, क्षमता निर्माण और विकास से जुड़ी गतिविधियों के लिए फंडिंग शामिल है। साथ ही, पेंशन भुगतान को लंबे समय तक सुनिश्चित करने के लिए गैप फंडिंग को भी मंजूरी दी गई है, ताकि भविष्य में लाभार्थियों को किसी तरह की परेशानी न हो।
60 साल बाद मिलेगी गारंटीड पेंशन
अटल पेंशन योजना के तहत लाभार्थियों को 60 वर्ष की आयु के बाद 1,000 रुपए से लेकर 5,000 रुपए तक की गारंटीड मासिक पेंशन दी जाती है। पेंशन की राशि लाभार्थी द्वारा किए गए योगदान पर निर्भर करती है। यह योजना खासतौर पर असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, दिहाड़ी श्रमिकों, छोटे व्यापारियों और ग्रामीण इलाकों में काम करने वालों के लिए बनाई गई है।
बुढ़ापे की आर्थिक सुरक्षा पर जोर
सरकार का कहना है कि अटल पेंशन योजना बुढ़ापे में नियमित आय का सहारा देती है और ज्यादा से ज्यादा लोगों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने में मदद करती है। इसी उद्देश्य से योजना की पहुंच बढ़ाने और जागरूकता अभियान तेज करने पर जोर दिया जा रहा है।
पेंशनयुक्त समाज की दिशा में कदम
9 मई 2015 को शुरू की गई अटल पेंशन योजना का मकसद देश में पेंशनयुक्त समाज का निर्माण करना है, ताकि हर नागरिक रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर रह सके। छोटे लेकिन नियमित योगदान के जरिए यह योजना सुरक्षित भविष्य की गारंटी देती है।
8.66 करोड़ से ज्यादा लोग जुड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 19 जनवरी 2026 तक अटल पेंशन योजना से 8.66 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। सरकार का मानना है कि योजना की लोकप्रियता और स्थिरता बनाए रखने के लिए लंबे समय तक समर्थन जरूरी है। कैबिनेट का यह फैसला सामाजिक सुरक्षा को लेकर सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।