Crisil Warns: ट्रंप के टैरिफ वॉर से भारतीय बैंकों पर संकट! MSME सेक्टर में बढ़ सकता है NPA का खतरा

Edited By Updated: 07 Oct, 2025 11:21 AM

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले का सीधा असर अब भारतीय बैंकों और एमएसएमई सेक्टर पर पड़ सकता है। घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने चेतावनी दी है कि...

बिजनेस डेस्कः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले का सीधा असर अब भारतीय बैंकों और एमएसएमई सेक्टर पर पड़ सकता है। घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने चेतावनी दी है कि ट्रंप के टैरिफ वॉर के चलते भारत के छोटे और मझोले उद्यमों (MSME) को अपने कर्ज चुकाने में मुश्किलें आ सकती हैं। इससे बैंकों के एनपीए (NPA) में इजाफे का खतरा बढ़ गया है, क्योंकि टैरिफ बढ़ने से इन उद्यमों की कमाई और निर्यात दोनों पर दबाव पड़ने की आशंका है।

क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, एमएसएमई सेक्टर के एनपीए वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक बढ़कर 3.9 प्रतिशत तक पहुंच सकते हैं। फिलहाल यह आंकड़ा 2024-25 के अंत में 3.59 प्रतिशत था। एजेंसी की निदेशक सुभा श्री नारायणन के मुताबिक, यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाए गए 50 प्रतिशत तक के शुल्क के कारण होगी।

किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर

क्रिसिल ने बताया कि कपड़ा, परिधान, कालीन, रत्न-आभूषण, झींगा और प्रसंस्कृत समुद्री खाद्य पदार्थ जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। इन उद्योगों का अमेरिका को निर्यात अधिक होता है, इसलिए इन क्षेत्रों में कर्ज वसूली का जोखिम बढ़ सकता है।

भारत पर क्यों बढ़ा टैरिफ

ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी उद्योगों की सुरक्षा के नाम पर भारत समेत कई देशों पर अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) लगा दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस से तेल आयात जारी रखने की वजह से भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है, जिससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इससे लगभग 60 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात पर असर पड़ने की संभावना है।

बैंकों के लिए बढ़ी चुनौती

पिछले कुछ वर्षों में सरकार के सुधारात्मक कदमों से एनपीए में गिरावट आई थी लेकिन ट्रंप के टैरिफ वॉर ने बैंकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यदि स्थिति नहीं सुधरी तो छोटे-मझोले उद्योगों की कमाई पर दबाव बनेगा और एनपीए में नई उछाल देखने को मिल सकती है।
 
 

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