मुख्यमंत्री ने एफ.पी.ओ. के किसानों से किया सीधा संवाद

Edited By Updated: 25 Mar, 2023 07:04 PM

called upon the farmers f p o linked storage

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किसानों का आह्वान किया कि किसान एफ.पी.ओ. से जुड़ कर खेती करें, ताकि उनकी कृषि लागत में कमी आए और उन्हें अधिक लाभ प्राप्त हो सके। किसान सूक्ष्म सिंचाई, टपका सिंचाई इत्यादि प्रणाली को अपनाएं। उन्होंने कहा कि समय की...

चंडीगढ़, (पांडेय): हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किसानों का आह्वान किया कि किसान एफ.पी.ओ. से जुड़ कर खेती करें, ताकि उनकी कृषि लागत में कमी आए और उन्हें अधिक लाभ प्राप्त हो सके। किसान सूक्ष्म सिंचाई, टपका सिंचाई इत्यादि प्रणाली को अपनाएं। उन्होंने कहा कि समय की मांग के अनुसार आज किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की आवश्यकता है। प्राकृतिक खेती से भूमि की उपजाऊ शक्ति भी बढ़ती है और रासायनिक खाद पर निर्भरता न होने से उत्पादन लागत में भी कमी आती है और उत्पादन भी बढ़ता है। मुख्यमंत्री शनिवार को किसान उत्पादक समूहों (एफ.पी.ओ.) के किसानों से ऑडियो कॉन्फ्रैंसिंग से सीधा संवाद कर रहे थे। मनोहर लाल ने कहा कि किसानों को आधुनिक तकनीक प्रबंधन, भंडारण, विपणन का ज्ञान प्रदान कर उनकी आय बढ़ाने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फरवरी, 2020 में किसान उत्पादक समूह की परिकल्पना की थी। देश में 10 हजार एफ.पी.ओ. बनाने का लक्ष्य रखा गया था। हरियाणा के किसान भी इस योजना का अधिकतम लाभ उठा रहे हैं। प्रदेश में 731 एफ.पी.ओ. बने हुए हैं। 
 

 

 

एफ.पी.ओ. को ग्रेडिंग, ब्रांडिंग सहित मिल रही वित्तीय सहायता
इस दौरान किसानों ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार किसानों के लिए हितकारी योजनाएं क्रियान्वित कर रही है। सरकार की ओर से एफपीओ को वित्तीय सहायता तथा उत्पादों की ग्रेडिंग, ब्रांडिंग से संबंधित अन्य कई प्रकार की सहायता होने पर किसानों पर आर्थिक बोझ तो कम हुआ ही और साथ ही उन्हें अपनी उपज का सही दाम भी मिलने लगा है। अटेरना ऑर्गेनिक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, जिला सोनीपत के जैनेंद्र चौहान ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके एफ.पी.ओ. से 500 किसान जुड़े हुए हैं और वे बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न की खेती करते हैं। उन्होंने बताया कि पहले किसान आजादपुर मंडी में अपनी उपज बेचते थे, जहां उन्हें कम भाव मिलता था लेकिन एफ.पी.ओ. से जुडऩे के बाद अब हम अपने उत्पाद विदेशों में भी बेचते हैं, जिससे किसानों को अधिक भाव मिलने के कारण सीधा लाभ हुआ है। पिहोवा वेजीटेबल्स फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, जिला कुरुक्षेत्र के अनुराग ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके साथ 300 किसान जुड़े हुए हैं, जो आलू की खेती करते हैं। अलग-अलग कंपनी से टाई-अप किया हुआ है, जिससे किसानों को लाभ हो रहा है। खारी सुरैरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, जिला सिरसा के मनोज सिहाग ने भी बताया कि उनके साथ लगभग 300 किसान जुड़े हुए हैं और वे किन्नू और माल्टा की खेती करते हैं। बागवानी विभाग द्वारा ट्रांसपोर्टेशन पर भी सब्सिडी प्राप्त हुई है, जिससे देशभर में अपने उत्पाद बेचने में आसानी हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि भविष्य में उन्हें किसी भी प्रकार की कोई कठिनाई का सामना करना पड़ता है तो, सरकार सदैव उनके साथ खड़ी है। 
 

 

 

एफ.पी.ओ. से जुड़कर किसान बनें उद्यमी
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान अपने एफ.पी.ओ. के माध्यम से पैक हाऊस बनाकर उसमें अपनी उपज का भंडारण कर उसे खराब होने से बचा सकते हैं। साथ ही उपज की ग्रेडिंग और पैकेजिंग भी स्वयं करके न केवल बिचौलियों के शोषण से बचेंगे, बल्कि बाजार से भी सीधे जुड़ेंगे। फसल सीजन समाप्त होने पर भी कृषि उत्पाद की आपूर्ति पैक हाऊस से की जाती रहेगी और किसान को आय प्राप्त होती रहेगी। इससे भी आगे बढ़कर किसान विभिन्न प्रकार के कृषि उत्पाद स्वयं तैयार कर सकते हैं। किसान केवल पैदावार करने वाले किसान ही नहीं रहेंगे, बल्कि कृषि आधारित लघु उद्योग चलाने वाले उद्यमी बन जाएंगे। उन्होंने कहा कि हरियाणा में ताजे फलों और सब्जियों की आपूर्ति के लिए काफी संभावनाएं मौजूद हैं। जिला यमुनानगर में हल्दी की पैदावार होती है। वहां हल्दी के उत्पाद तैयार किये जा सकते हैं। इसी प्रकार, जिला सिरसा में किन्नू और कुरुक्षेत्र में आलू, करनाल में सब्जियों व जिला सोनीपत में बेबीकॉर्न व मशरूम की भरपूर पैदावार होती है। उन्होंने कहा कि एफपीओ सहकारी क्षेत्र का आधुनिक स्वरूप है। हरियाणा में वीटा भी इसका एक उदाहरण है।

 

 

 

हर ब्लॉक में एक एफ.पी.ओ. गठन के मामले में हरियाणा देश में शीर्ष राज्यों में शामिल 
संवाद कार्यक्रम में बागवानी विभाग के महानिदेशक डॉ अर्जुन सैनी ने बताया कि हर ब्लॉक में एफ.पी.ओ. गठन के मामले में हरियाणा और छत्तीसगढ़ को नंबर वन राज्य का दर्जा मिला है। एफ.पी.ओ. को मदद और विभिन्न प्रकार के प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। 3 साल की अवधि के दौरान प्रत्येक नए एस.एफ.ए.सी. को 18 लाख की मदद व प्रबंधन सहायता प्रदान की जाती है। कलस्टर आधारित व्यावसायिक संगठनों को एफ.पी.ओ. के गठन और प्रोत्साहन के लिए 5 साल की अवधि के दौरान प्रति एफ.पी.ओ. 25 लाख का लागत भुगतान किया जाता है। वर्ष 2023-24 में बागवानी विभाग को लगभग 750 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।

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