आंखों पर पट्टी-हथकड़ी व लंगड़ाती चालः अमेरिकी गिरफ्त में कुछ इस हाल में दिखे मादुरो, क्या पीट-पीट कर लाए गए मैनहट्टन ? (Video)

Edited By Updated: 04 Jan, 2026 12:23 PM

maduro arrives at detention centre in us after strike on venezuela

अमेरिकी सेना ने गुप्त अभियान में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर अमेरिका पहुंचा दिया। मैनहट्टन ले जाए गए मादुरो पर नशीले पदार्थों से जुड़े आतंकवाद के आरोप हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने वेनेजुएला के तेल संसाधनों को लेकर...

Washington: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी सेना द्वारा एक गुप्त और बड़े सैन्य अभियान में गिरफ्तार कर अमेरिका लाया गया है। आंखों पर पट्टी, हाथों में हथकड़ी,  लंगड़ाती चाल और चारों ओर अमेरिकी संघीय एजेंटों के सख्त पहरे के बीच मादुरो को हेलीकॉप्टर से मैनहट्टन पहुंचाया गया। उनको इस हाल में देख कर कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या उनको पीट-पीट कर इस हाल में यहां लाया गया। इस दौरान कानून प्रवर्तन एजेंसियों का भारी काफिला मौजूद था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मादुरो की गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद बड़ा और विवादास्पद बयान देते हुए कहा कि अमेरिका कम से कम अस्थायी तौर पर वेनेजुएला का संचालन करेगा और उसके विशाल तेल भंडार का दोहन कर अन्य देशों को तेल बेचेगा। ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला के तेल बुनियादी ढांचे को “ठीक” करने की जरूरत है।

 

यह सैन्य कार्रवाई शनिवार तड़के की गई, जब अमेरिकी विशेष बलों ने काराकस के एक सैन्य अड्डे पर स्थित मादुरो के आवास से उन्हें और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया। इसके बाद दोनों को पहले एक अमेरिकी युद्धपोत पर ले जाया गया और फिर विमान से अमेरिका भेजा गया।मादुरो पर अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने नार्को-टेररिज्म, मादक पदार्थों की तस्करी और साजिश के गंभीर आरोप लगाए हैं। अधिकारियों के अनुसार, मुकदमे की प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें न्यूयॉर्क की ब्रुकलिन स्थित संघीय जेल में रखा जा सकता है।

 

इस कार्रवाई के बाद वेनेजुएला में राजनीतिक उथल-पुथल मच गई। उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने अमेरिका से मादुरो को तुरंत रिहा करने की मांग करते हुए उन्हें देश का वैध नेता बताया। हालांकि, कुछ ही देर बाद वेनेजुएला की शीर्ष अदालत ने अंतरिम राष्ट्रपति नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया।कानूनी विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस अमेरिकी कार्रवाई की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह इराक युद्ध के बाद किसी देश में सत्ता परिवर्तन की दिशा में अमेरिका की सबसे आक्रामक कार्रवाई है।

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