Edited By Priyanka rana,Updated: 27 Nov, 2019 08:37 AM

निगम सदन की मंगलवार को हुई बैठक में पार्षदों के वार्ड डिवैल्पमैंट फंड के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। इस पूरे हंगामे में निगम का समय भी खराब हुआ और हंगामा शांत होते-होते 1 बज गया।
चंडीगढ़(राय) : निगम सदन की मंगलवार को हुई बैठक में पार्षदों के वार्ड डिवैल्पमैंट फंड के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। इस पूरे हंगामे में निगम का समय भी खराब हुआ और हंगामा शांत होते-होते 1 बज गया। पार्षद इस बात से नाराज थे कि वार्ड वाईज पार्षदों के खर्चों पर आधारित सूची कैसे सार्वजनिक कर दी गई? इससे अखबारों में पिछले दिनों आई खबर से जनता के बीच यह भ्रम फैला कि पार्षद अपने वार्ड में पैसा होने के बाद भी विकास कार्य नहीं कराते हैं।
कांग्रेस पार्षद दल के नेता दविंदर सिंह बबला और रविंदर कौर गुजराल ने कहा कि वार्ड फंड 40 से बढ़कर 80 लाख रुपए कर दिया गया है, लेकिन इसकी कोई भी जानकारी किसी पार्षद को नहीं दी गई। वहीं भाजपा पार्षदों का तर्क था कि जिस समय बजट पास किया गया था, उसी समय ही वार्ड फंड दोगुना कर दिया गया था।
बैठक के दौरान कांग्रेसी पार्षदों ने कहा कि बेशक वार्ड फंड दोगुना कर दिया गया है, लेकिन जो भी कार्य अधिकारियों को बताए जाते हैं, वह वित्तीय संकट का हवाला देकर नहीं किए जा रहे। रविंदर कौर ने कहा कि उनके वार्ड की ग्रीन बैल्ट में जो पब्लिक टॉयलेट बने हुए हैं, उनमें तैनात कर्मचारियों को 6 माह से वेतन नहीं मिल रहा है। कांग्रेसी पार्षद ने कहा कि मेयर को सुनने का मादा रखना चाहिए।
वार्डों में पैंडिंग काम पार्षदों को ही करवाने हैं :
मेयर कालिया ने कहा कि जो भी पार्षदों के वार्ड में काम पैंडिंग हैं, वह उन्हें ही करवाने हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्षद रविंद्र कौर गुजराल का एक वीडियो जारी हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा है कि 4 से 5 लाख रुपए उनके वार्ड फंड में मिले हैं।
मेयर ने कहा कि वार्ड डिवैल्पमैंट फंड की राशि पहले से तय है और वित्तीय संकट के नाम पर इसे जारी करने से कभी भी मना नहीं किया गया। फंड बढऩे की बात छिपाने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि सरकारी दस्तावेज को कभी छिपाया नहीं जा सकता।
अगर हम ऐसा करेंगे तो जनता में संदेश जाएगा कि किसी गलत कार्य की वजह से ऐसा किया गया है। भाजपा पार्षद गुरप्रीत सिंह ढिल्लों ने कहा कि लोगों को लगता है कि पार्षद जानबूझकर वार्ड फंड खर्च नहीं कर रहे, जबकि काम करवाने के लिए पैसा नहीं होने की बात अधिकारी कहते हैं।
पार्षदों ने साधा निशाना, मीडिया कर्मियों ने किया बहिष्कार :
पहले पार्षद गुरप्रीत सिंह ढिल्लों और उसके बाद भाजपा पार्षद फरमिला ने मीडिया पर निशाना साधते हुए शब्दों के चयन में हदें पार कर दी। फरमिला ने तो मानहानि की चेतावनी तक दे डाली, जिससे प्रैस गैलरी में बैठे मीडियाकर्मी अपनी सीटों से उठकर बाहर चले गए। जब मीडिया पर हमला हो रहा था तो दोनों पार्षदों को पूर्व मेयर अरुण सूद और आशा जसवाल का भी सहयोग मिल रहा था।
पार्षद अरुण सूद तो फॉसवेक की बैठक में आए बयान पर निगम से स्पष्टीकरण मांगे जाने की बेतुकी मांग करने लगे। उन्हें इस बात की नाराजगी थी कि फॉसवेक की बैठक एक-एक करोड़ की राशि दिए जाने के नाम पर निशाने पर लिया गया था। निगम आयुक्त ने उनकी मांग को खारिज कर दिया कि हम किसी बाहरी एजैंसी से स्पष्टीकरण लेने के लिए बाध्य नहीं है। जबकि मनोनीत पार्षद मेजर जनरल एम.एस. कंडल ने नकारात्मक खबर पर मीडिया को तथ्यों की सही परख की नसीहत तक दे डाली।
फिर फरमिला ने कहा, मेरी कोई मंशा नहीं थी :
आलम यह रहा कि मेयर के समझाए बुझाने के बाद जब प्रैस गैलरी में मीडियाकर्मी लौटे तो पार्षद गुरप्रीत ढिल्लो और फरमिला को डेमेज कंट्रोल के तहत सफाई देनी पड़ी। फरमिला ने कहा कि उनकी कोई मंशा नहीं थी जब व्यक्तिगत नाम आता है तो पीड़ा होती है। इसी तरह ढिल्लों ने कहा कि उनका मकसद किसी को निशाना बनाना नहीं था वह तो सिर्फ स्पष्टता चाहते थे।