Edited By ,Updated: 12 Feb, 2015 08:58 AM

प्राचीनकाल में भोजन करते समय जमीन पर आसन बिछाकर पालथी मारकर यानी सुखासन लगाकर खाना खाया जाता था। भोजन करने की एक सामान्य आदत किसी एक व्यक्ति के लिए बढिय़ा हो सकती है परन्तु
प्राचीनकाल में भोजन करते समय जमीन पर आसन बिछाकर पालथी मारकर यानी सुखासन लगाकर खाना खाया जाता था। भोजन करने की एक सामान्य आदत किसी एक व्यक्ति के लिए बढिय़ा हो सकती है परन्तु उसी समस्या से जूझ रहे किसी अन्य व्यक्ति के लिए यह कारगर नहीं भी हो सकती। फिर भी कुछ नियम सभी के लिए बहुत बढिय़ा रहते हैं। भोजन सिर्फ हमें ऊर्जा ही नहीं देता, बल्कि हमारे शरीर के विकास और स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है।
ऐसी ही आदत में शुमार है डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाना ग्रहण करना या रोगों को बुलावा देना। हमारी जीवन शैली काफी अस्त व्यस्त है और ये वो परिस्थितियां है जो हमने खुद बनाई हैं। इसी कारण हम ऐसी बीमारियों और व्याधियों के शिकार हो रहे हैं जो हमारे पूर्वजों के समय मेंं नहीं थी।
पाश्चय संस्कृति को अपनाते हुए भूमी पर बैठकर खाना खाने की परंपरा का अब लगभग अंत हो गया है। जिसका स्वास्थ्य पर बहुत दुष्प्रभाव पड़ता है। पालथी मारकर बैठ कर अथवा सुखासन में बैठने से आप बहुत से रोगों से निजात पा सकते हैं। आईए जानें क्या हैं लाभ
- मन को एकाग्र करने का सरलतम माध्यम।
- वीर्य रक्षा होती है।
- छाती और पैर ठोस होते हैं।
- जठराग्नि प्रज्ज्वलित होती है और खाना अच्छे से पचता है।
जिन लोगों के पैरों, घुटनों अथवा रीढ़ के निचले भाग में दर्द हो या साइटिका की समस्या से जूझ रहे हो वह जमीन पर बैठकर भोजन ग्रहण करें।