शिव-शक्ति को अर्पित होगा कान्हा का अनुराग ! ब्रज से निकली गुलाल यात्रा, काशी में मनेगा महा-उत्सव

Edited By Updated: 27 Feb, 2026 12:08 PM

braj gulal yatra

मथुरा के कान्हा और काशी के महादेव के बीच आध्यात्मिक प्रेम की एक अनूठी कड़ी इस वर्ष की रंगभरी एकादशी 27 फरवरी 2026 पर देखने को मिल रही है।

Braj Gulal Yatra : मथुरा के कान्हा और काशी के महादेव के बीच आध्यात्मिक प्रेम की एक अनूठी कड़ी इस वर्ष की रंगभरी एकादशी 27 फरवरी 2026 पर देखने को मिल रही है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि से 'गुलाल यात्रा' का काशी की ओर प्रस्थान करना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि ब्रज और काशी की सांस्कृतिक एकता का महापर्व है।

ब्रज का उपहार: कान्हा की ओर से महादेव को 
26 फरवरी 2026 को सुबह 10 बजे श्रीकृष्ण जन्मभूमि के ठाकुर केशवदेव मंदिर से यह भव्य यात्रा वाराणसी के लिए रवाना हुई। इस यात्रा के जरिए बाबा विश्वनाथ के लिए सवा मन गुजिया, मथुरा का प्रसिद्ध नील गुलाल, सुगंधित अबीर, फल और विशेष पुष्प भेजे गए हैं। मान्यता है कि ब्रज के राजा कान्हा, काशी के अधिपति महादेव को अपनी नगरी का रंग भेजकर होली का निमंत्रण दे रहे हैं।

काशी में महा-उत्सव: रंगभरी एकादशी का उल्लास
जब यह गुलाल यात्रा 27 फरवरी को काशी विश्वनाथ धाम पहुंचेगी, तो वहां का नजारा अद्भुत होगा। मथुरा से आए इसी गुलाल और अबीर से भगवान शिव और माता पार्वती का विशेष शृंगार किया जाएगा। पहली बार ब्रज के ग्वाल-गोपी और लोक कलाकार विश्वनाथ धाम के प्रांगण में 'होली रशिया' का गायन और पुष्प होली का जीवंत प्रदर्शन करेंगे। दिलचस्प बात यह है कि काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर से भी मथुरा के 'लड्डू गोपाल' के लिए विशेष वस्त्र, खिलौने, चॉकलेट और भस्म भेजा गया है।

क्यों खास है यह यात्रा ?
यह पहल दोनों धामों के बीच एक आध्यात्मिक सेतु का काम कर रही है, जिससे नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध विरासत का पता चलता है। रंगभरी एकादशी वह दिन है जब शिव माता पार्वती का गौना कराकर काशी लाए थे। इस खुशी में ब्रज के रंगों का शामिल होना उत्सव को और भी दिव्य बना देता है। यह आयोजन संदेश देता है कि भले ही रूप अलग हों लेकिन सनातन धर्म की आत्मा एक ही है।

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