Edited By Niyati Bhandari,Updated: 08 Jan, 2020 07:25 AM

सनातन हिंदू शास्त्रों में त्रयोदशी को परम सुख और आनंद प्रदान करने वाली तिथि कहा गया है। इस दिन कोई भी शुभ काम किया जा सकता है। बहुत से शिव भक्त इस रोज़ व्रत-उपवास अवश्य रखते हैं।
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सनातन हिंदू शास्त्रों में त्रयोदशी को परम सुख और आनंद प्रदान करने वाली तिथि कहा गया है। इस दिन कोई भी शुभ काम किया जा सकता है। बहुत से शिव भक्त इस रोज़ व्रत-उपवास अवश्य रखते हैं। कहते हैं जो साधक ऐसा करते हैं, उनकी कुंडली के लगभग सभी दोषों का नाश हो जाता है और सभी सांसारिक वस्तुएं उसे प्राप्त हो जाती हैं। आज पौष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है और साल 2020 का पहला प्रदोष व्रत है। ये दिन बुधवार को पड़ रहा है इसलिए इसे बुध प्रदोष कहा जाएगा। बुध प्रदोष के दिन किए गए हर काम में सफलता मिलती है। जीवन में चल रहे सभी तरह के संतापों का नाश होता है।
शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत में शिव पूजा सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद करनी चाहिए।

पूजा विधि
शिवलिंग को दस पवित्र चीजों से स्नान करवाएं- जल, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, इत्र, चंदन, केसर और भांग। शिवपुराण के अनुसार इन वस्तुओं से शिवलिंग को स्नान करवाने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। स्नान करवाते वक्त अपने मन में ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करते जाएं। ऐसा करने से व्यक्तित्व में गजब का निखार आता है।

शिवलिंग को स्नान करवाने से गाड़ी-बंगले का सपना तो पूरा होगा साथ में मिलेंगे ये लाभ
शहद से स्नान करवाएंगे तो आपकी वाणी में मीठी- मीठी बातें करने का हुनर आएगा। क्रोध शांत होगा।
दूध चढ़ाने से बीमार व्यक्ति की सेहत में सुधार आता है।
दही अर्पित करने से व्यवहार में निर्मलता आती है।
घी चढ़ाने से भौतिक शक्ति में विकास होता है।

शिवलिंग पर इत्र लगाने से विचारों में सकारात्मकता की खुशबू आती है।
वैभव और सम्मान प्राप्त करने के लिए भगवान शिव को चंदन लगाएं।
केसर चढ़ाने से कोमलता और विनम्रता आती है।

भांग का भोग लगाने से व्यक्तित्व में सकारात्मकता आती है।
शक्कर का भोग लगाने से जीवन की हर खुशी मिलती है।