Edited By Prachi Sharma,Updated: 03 Feb, 2026 04:44 PM

Business Vastu Tips : व्यापार में दिन-रात मेहनत करने के बाद भी यदि फल मीठा न मिले, बैंक बैलेंस बढ़ने के बजाय कर्ज बढ़ता जाए और ग्राहक आकर भी बिना कुछ खरीदे लौट जाएं, तो समझ लीजिए कि समस्या आपकी मेहनत में नहीं, बल्कि आपके कार्यक्षेत्र के वास्तु में हो...
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
Business Vastu Tips : व्यापार में दिन-रात मेहनत करने के बाद भी यदि फल मीठा न मिले, बैंक बैलेंस बढ़ने के बजाय कर्ज बढ़ता जाए और ग्राहक आकर भी बिना कुछ खरीदे लौट जाएं, तो समझ लीजिए कि समस्या आपकी मेहनत में नहीं, बल्कि आपके कार्यक्षेत्र के वास्तु में हो सकती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, हर दिशा एक विशेष ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है। यदि व्यापारिक स्थल पर दिशाओं का संतुलन बिगड़ जाए, तो सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है और नुकसान होना शुरू हो जाता है।
मुख्य द्वार और प्रवेश की दिशा
व्यापार में सफलता का द्वार वहीं से खुलता है जहाँ से आप और आपके ग्राहक प्रवेश करते हैं। यदि दुकान या ऑफिस का मुख्य द्वार दक्षिण-पश्चिम दिशा में है, तो यह धन के ठहराव को रोकता है और बेवजह के खर्चे बढ़ाता है। मुख्य द्वार को हमेशा साफ-सुथरा रखें। द्वार पर ऊँ या स्वास्तिक का चिन्ह लगाएं। प्रवेश द्वार के सामने कभी भी कूड़ेदान या बिजली का खंभा नहीं होना चाहिए।

बैठने की सही दिशा
व्यापार के स्वामी का बैठना सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि वहीं से पूरे बिजनेस का नियंत्रण होता है। यदि मालिक का मुख दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर है, तो निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है। मालिक को हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। आपकी पीठ के पीछे एक ठोस दीवार होनी चाहिए, खिड़की या दरवाजा नहीं। यह आपके आत्मविश्वास और अधिकार को मजबूत करता है।
धन का स्थान
तिजोरी या गल्ला वह स्थान है जहां महालक्ष्मी का वास होता है। यदि कैश बॉक्स दक्षिण दिशा की ओर खुलता है, तो पैसा पानी की तरह बह जाता है। गल्ले या तिजोरी को हमेशा उत्तर की दीवार से सटाकर रखें, ताकि उसका मुंह उत्तर की ओर खुले। उत्तर दिशा कुबेर की दिशा है। तिजोरी के अंदर एक छोटा दर्पण लगाएं ताकि धन का प्रतिबिंब दिखे, इससे आवक दोगुनी होती है।

भारी सामान और स्टॉक
दुकान या गोदाम में सामान रखने का भी एक निश्चित नियम है। उत्तर या पूर्व दिशा में भारी स्टॉक रखने से सकारात्मक ऊर्जा दब जाती है और बिक्री कम हो जाती है। भारी सामान, मशीनरी या कच्चा माल हमेशा दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखें। उत्तर और पूर्व के कोनों को जितना हो सके खाली और हल्का रखें।
ईशान कोण का महत्व
वास्तु में ईशान कोण को देवताओं का स्थान माना गया है। इस कोने में शौचालय, सीढ़ियां या कचरा होना व्यापार को पूरी तरह ठप कर सकता है। यह 'कैंसर' के समान वास्तु दोष माना जाता है। इस कोने को हमेशा पवित्र रखें। यहाँ एक छोटा जल स्रोत या फव्वारा रखें। बहता हुआ पानी व्यापार में कैश फ्लो को बढ़ाता है। यहां मंदिर बनाना भी अत्यंत शुभ होता है।
