Chaiti Chhath Puja 2026 : कब है नहाय-खाय और कब दिया जाएगा भगवान भास्कर को अर्घ्य? नोट कर लें चैती छठ की पूरी डेट

Edited By Updated: 15 Mar, 2026 04:46 PM

chaiti chhath puja 2026

लोक आस्था और सूर्य उपासना का महापर्व छठ, भारतीय संस्कृति की अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। साल में दो बार मनाए जाने वाले इस महापर्व की छटा चैत्र मास में भी उतनी ही दिव्य होती है, जिसे हम चैती छठ के नाम से जानते हैं।

Chaiti Chhath Puja 2026 : लोक आस्था और सूर्य उपासना का महापर्व छठ, भारतीय संस्कृति की अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। साल में दो बार मनाए जाने वाले इस महापर्व की छटा चैत्र मास में भी उतनी ही दिव्य होती है, जिसे हम चैती छठ के नाम से जानते हैं। कड़े अनुशासन, पवित्रता और अटूट विश्वास के साथ रखे जाने वाले इस व्रत की शुरुआत साल 2026 में 22 मार्च से होने जा रही है। चाहे नहाय-खाय की सात्विकता हो या उगते सूर्य को अर्घ्य देने का धैर्य, चैती छठ का हर दिन भक्तों के लिए एक नई आध्यात्मिक ऊर्जा लेकर आता है। यदि आप भी इस वर्ष छठी मैया का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए व्रत अनुष्ठान की योजना बना रहे हैं, तो तिथियों और पूजा विधान का सही ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। तो आइए जानते हैं, इस वर्ष नहाय-खाय से लेकर पारण तक की पूरी समय-सारणी के बारे में-

Chaiti Chhath Puja 2026

Chaiti Chhath 2026 Start Date चैती छठ कब से प्रारंभ है 2026 
साल 2026 में चैती छठ का आगाज़ 22 मार्च को नहाय-खाय के साथ होगा, जबकि 25 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ इस महापर्व का समापन किया जाएगा।

The 4 Days of Chaiti Chhath चैती छठ के 4 दिन
नहाय-खाय (22 मार्च 2026, रविवार)
छठ महापर्व के पहले दिन को 'नहाय-खाय' कहा जाता है। इस दिन से ही व्रत का संकल्प लिया जाता है। व्रती इस दिन पवित्र नदियों या तालाबों में स्नान करते हैं। इसके बाद सात्विक भोजन तैयार किया जाता है। मुख्य रूप से अरवा चावल, चने की दाल और कद्दू की सब्जी का सेवन किया जाता है, जिसे कद्दू-भात भी कहते हैं।

खरना (23 मार्च 2026, सोमवार)
दूसरे दिन को खरना या लोहंडा कहा जाता है। इस दिन का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। व्रती दिन भर उपवास रखते हैं और शाम को मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी जलाकर प्रसाद तैयार करते हैं। गुड़ से बनी चावल की खीर (रसियाव) और शुद्ध घी लगी रोटी का भोग छठी मैया को लगाया जाता है। इसी प्रसाद को ग्रहण करने के बाद व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है।

Chaiti Chhath Puja 2026

संध्या अर्घ्य (24 मार्च 2026, मंगलवार)
तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह इस महापर्व का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। व्रती महिलाएं और पुरुष शाम के समय नदी या तालाब के किनारे जाते हैं। बांस की टोकरी में ठेकुआ, मौसमी फल और अन्य पूजन सामग्री सजाकर भगवान भास्कर की पूजा की जाती है। डूबते सूर्य को अर्घ्य देना इस बात का प्रतीक है कि जीवन में अंत भी उतना ही सुंदर और पूजनीय है जितना आरंभ।

उषा अर्घ्य और पारण (25 मार्च 2026, बुधवार)
चौथे और अंतिम दिन उगते हुए सूर्य की वंदना की जाती है। सुबह सूर्योदय से पहले ही श्रद्धालु घाटों पर पहुंच जाते हैं। जैसे ही सूर्य देव की पहली किरण दिखाई देती है, उन्हें अर्घ्य अर्पित किया जाता है। सूर्य को अर्घ्य देने और छठी मैया से आशीर्वाद लेने के बाद, व्रती कच्चे दूध का शरबत पीकर और प्रसाद खाकर अपना व्रत खोलते हैं।

चैती छठ का महत्व
कार्तिक छठ की तुलना में चैती छठ में गर्मी और मौसम के बदलाव की वजह से निर्जला व्रत रखना अधिक कठिन माना जाता है। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु पूरी श्रद्धा से सूर्य देव और छठी मैया की आराधना करते हैं, उनके घर में सुख, समृद्धि और आरोग्य का वास होता है।

Chaiti Chhath Puja 2026

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!