Edited By Niyati Bhandari,Updated: 18 Mar, 2026 03:44 PM

Chaitra Navratri 2026 Decoration Tips: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व मां दुर्गा की आराधना और भक्ति का विशेष समय होता है। इस दौरान घर में मां का मंदिर सजाना न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि को भी आकर्षित करता...
Chaitra Navratri 2026 Decoration Tips: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व मां दुर्गा की आराधना और भक्ति का विशेष समय होता है। इस दौरान घर में मां का मंदिर सजाना न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि को भी आकर्षित करता है। वास्तु और परंपराओं के अनुसार यदि मंदिर को सही तरीके से सजाया जाए तो मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

नवरात्रि के पहले दिन सबसे पहले पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। मंदिर को स्वच्छ और पवित्र रखना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। इसके बाद मंदिर में लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं, क्योंकि ये रंग मां दुर्गा को अत्यंत प्रिय होते हैं और शुभता का प्रतीक माने जाते हैं।
मंदिर सजाते समय मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर को उचित स्थान पर स्थापित करें। ध्यान रखें कि मां की मूर्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। इसके बाद मंदिर में फूलों से सजावट करें। खासतौर पर लाल फूल जैसे गुलाब या गुड़हल का उपयोग करना शुभ माना जाता है। आप ताजे फूलों की माला बनाकर भी मां को अर्पित कर सकते हैं।

नवरात्रि में दीपक और ज्योति का विशेष महत्व होता है। इसलिए मंदिर में घी का दीपक अवश्य जलाएं। यदि संभव हो तो अखंड ज्योति भी जलाई जा सकती है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही धूप और अगरबत्ती से वातावरण को सुगंधित बनाएं।
मंदिर में कलश स्थापना करना भी बेहद जरूरी माना जाता है। इसके लिए एक साफ पात्र में जल भरकर उसमें आम के पत्ते और नारियल रखें। यह कलश समृद्धि और शुभता का प्रतीक होता है। साथ ही जौ (खेतरी) बोना भी शुभ माना जाता है, जो उन्नति और विकास का संकेत देता है।
सजावट के दौरान ध्यान रखें कि मंदिर में ज्यादा भीड़भाड़ या अनावश्यक वस्तुएं न रखें। सादगी और पवित्रता बनाए रखना ही सबसे महत्वपूर्ण है। नवरात्रि के नौ दिनों तक नियमित रूप से मां की पूजा, आरती और मंत्र जाप करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। अंततः, श्रद्धा और भक्ति के साथ सजाया गया मां का मंदिर ही सबसे सुंदर और प्रभावशाली होता है। यही सच्ची पूजा का आधार है।
