Edited By Prachi Sharma,Updated: 14 Feb, 2026 11:48 AM

Kedarnath Yatra 2026 : पंच केदार में प्रमुख और द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल केदारनाथ धाम को इस महाशिवरात्रि पर नया रावल मिलने जा रहा है। वर्तमान रावल भीमाशंकर लिंग ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों से पद छोड़ने का निर्णय लिया है और अपने शिष्य 42 वर्षीय...
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Kedarnath Yatra 2026 : पंच केदार में प्रमुख और द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल केदारनाथ धाम को इस महाशिवरात्रि पर नया रावल मिलने जा रहा है। वर्तमान रावल भीमाशंकर लिंग ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों से पद छोड़ने का निर्णय लिया है और अपने शिष्य 42 वर्षीय शिवाचार्य शांतिलिंग, जिन्हें केदार लिंग के नाम से भी जाना जाता है, को उत्तराधिकारी घोषित किया है।
महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित अपने मठ में 70 वर्षीय भीमाशंकर लिंग ने स्पष्ट किया कि अब वे स्वास्थ्य कारणों से नियमित दायित्व निभाने में सक्षम नहीं हैं इसलिए परंपरा का पालन करते हुए उन्होंने अपने शिष्य को केदारनाथ का अगला रावल नियुक्त करने का फैसला किया।
इस निर्णय की औपचारिक घोषणा 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर, जो पंचकेदार का गद्दीस्थल है, में की जाएगी। इसी अवसर पर केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि भी घोषित होगी। समारोह में पंचगांई क्षेत्र के डंगवाड़ी, भटवाड़ी, चुन्नी-मंगोली, किमाणा और पठाली डुंगर सेमला के हक-हकूकधारी व परंपरागत अधिकार रखने वाले ग्रामीण भी उपस्थित रहेंगे।
बीकेटीसी से जुड़े वरिष्ठ पुजारी शिव शंकर लिंग और पूर्व प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद भट्ट ने जानकारी दी कि नांदेड़ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भीमाशंकर लिंग ने आधिकारिक रूप से केदार लिंग महाराज को अपना उत्तराधिकारी चुना।
रावल पद की विशेष परंपरा
केदारनाथ के रावल अविवाहित होते हैं और कर्नाटक के वीरशैव संप्रदाय से जुड़े शिव भक्त होते हैं। परंपरा के अनुसार वही मंदिर में मुख्य पूजा-अर्चना का दायित्व निभाते हैं। कपाट खुलने से लेकर बंद होने तक रावल धाम में ही निवास करते हैं और समस्त धार्मिक अनुष्ठानों का नेतृत्व करते हैं। करीब चार शताब्दियों से चली आ रही इस परंपरा में भुकुंड लिंग को केदारनाथ का पहला रावल माना जाता है, जबकि भीमाशंकर लिंग 324वें रावल रहे हैं। अब महाशिवरात्रि पर 325वें रावल के रूप में शांतिलिंग इस आध्यात्मिक जिम्मेदारी को संभालेंगे।