Char Dham Yatra 2026 : बदरी-केदार से गंगोत्री-यमुनोत्री तक शानदार इंतजाम, चारधाम यात्रा 2026 का मेगा प्लान तैयार

Edited By Updated: 07 Feb, 2026 09:14 AM

char dham yatra 2026

Char Dham Yatra 2026 : उत्तराखंड में इस साल की चारधाम यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए शासन-प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। अप्रैल के मध्य से शुरू होने वाली इस यात्रा के लिए तैयारियों की रफ्तार तेज कर दी गई है, क्योंकि इस बार पिछले वर्षों की...

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Char Dham Yatra 2026 : उत्तराखंड में इस साल की चारधाम यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए शासन-प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। अप्रैल के मध्य से शुरू होने वाली इस यात्रा के लिए तैयारियों की रफ्तार तेज कर दी गई है, क्योंकि इस बार पिछले वर्षों की तुलना में समय काफी कम है।

जट और प्रशासनिक सक्रियता
यात्रा के सफल संचालन के लिए उत्तराखंड के सात प्रमुख जिलों ने अपनी जरूरतों के अनुसार लगभग 44 करोड़ रुपये का बजट प्रस्ताव शासन को भेजा है। चारधाम यात्रा प्रबंधन और नियंत्रण संगठन के माध्यम से भेजे गए इन प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य यात्रा मार्ग पर सुविधाओं का विस्तार और पुराने ढांचे की मरम्मत करना है।

 महत्वपूर्ण तिथियां 
इस वर्ष यात्रा का आगाज 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ होगा।

बदरीनाथ धाम: 23 अप्रैल को कपाट खुलेंगे।
केदारनाथ धाम: कपाट खुलने की तिथि का निर्धारण महाशिवरात्रि के दिन किया जाएगा।

इन सुविधाओं पर रहेगा विशेष जोर
प्रशासन का लक्ष्य यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं देना है। बजट का मुख्य हिस्सा इन क्षेत्रों में खर्च होगा:

स्वास्थ्य सेवाएं: एम्बुलेंस, पैरामेडिकल स्टाफ और दवाओं की उपलब्धता।

बुनियादी ढांचा: पेयजल, स्ट्रीट लाइट्स, पार्किंग और आवास गृहों का नवीनीकरण।

ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप: यात्रियों के मुख्य पड़ाव ऋषिकेश में निर्माण कार्यों के लिए 7 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

 परिवहन और रोटेशन व्यवस्था
श्रद्धालुओं को धामों तक पहुंचाने के लिए 2200 बसों का बेड़ा तैयार है। परिवहन विभाग और निजी रोटेशन कंपनियों के बीच जल्द ही बैठक होने वाली है, जिसमें किराए के निर्धारण, टैक्स और बसों के रूट मैनेजमेंट पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस साल यात्रा अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में ही शुरू हो रही है, जिससे विभागों के पास तैयारी के लिए बेहद सीमित समय बचा है। मंडलायुक्त और यात्रा संगठन के अधिकारियों का पूरा ध्यान इस बात पर है कि बजट मिलते ही धरातल पर काम शुरू हो जाए ताकि श्रद्धालुओं को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।

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