Edited By Prachi Sharma,Updated: 04 Feb, 2026 09:53 AM

Char Dham Yatra 2026 : आगामी चारधाम यात्रा के साथ गंगोत्री धाम में होने वाली गंगा आरती की परंपरा में एक अहम बदलाव होने जा रहा है। अब मंदिर समिति द्वारा उस प्राचीन और पौराणिक गंगा आरती को फिर से शुरू किया जाएगा, जिसे पहले बुजुर्गों और स्थानीय लोगों...
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Char Dham Yatra 2026 : आगामी चारधाम यात्रा के साथ गंगोत्री धाम में होने वाली गंगा आरती की परंपरा में एक अहम बदलाव होने जा रहा है। अब मंदिर समिति द्वारा उस प्राचीन और पौराणिक गंगा आरती को फिर से शुरू किया जाएगा, जिसे पहले बुजुर्गों और स्थानीय लोगों द्वारा गाया जाता था। पिछले कई वर्षों से यहां हरिद्वार और अन्य तीर्थ स्थलों में प्रचलित आरती का ही पाठ किया जा रहा था, लेकिन अब पुरानी धार्मिक परंपरा को दोबारा जीवित करने का निर्णय लिया गया है।
हाल ही में गंगोत्री धाम मंदिर समिति ने सिख और बौद्ध अनुयायियों को छोड़कर अन्य गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर फैसला लिया था। इसके बाद अब समिति ने अपनी धार्मिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए पारंपरिक गंगा आरती को पुनः अपनाने का ऐलान किया है।
मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि लंबे समय से गंगोत्री में अन्य तीर्थ स्थलों की आरती गाई जा रही थी, लेकिन इस वर्ष चारधाम यात्रा शुरू होते ही यहां सुबह और शाम की आरती में केवल पारंपरिक गंगा आरती का ही नियमित रूप से गायन किया जाएगा।
उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने इस फैसले को धार्मिक परंपराओं के संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल बताया। उनका कहना है कि इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को मां गंगा की प्राचीन आरती को जानने और सुनने का अवसर मिलेगा।
हाल ही में लोकगायिका श्रद्धा पांडे कुहुप्रिया ने इस पौराणिक गंगा आरती को अपनी आवाज दी है, जिसे श्रोताओं से अच्छा प्रतिसाद मिला है। इसी सकारात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए मंदिर समिति ने निर्णय लिया है कि अब गंगोत्री धाम में सुबह और शाम की आरती के दौरान “ॐ जय गंगे माई…” सहित इस पारंपरिक गंगा आरती का नियमित रूप से गायन किया जाएगा।