Edited By Sarita Thapa,Updated: 31 Jan, 2026 12:07 PM

देवभूमि की कठिन डगर अब श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बेहद आसान होने वाली है। हिमालय के सीने को चीरकर बनाई गई 5 किलोमीटर लंबी अत्याधुनिक सुरंग बनकर तैयार है।
Char Dham Yatra news : देवभूमि की कठिन डगर अब श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बेहद आसान होने वाली है। हिमालय के सीने को चीरकर बनाई गई 5 किलोमीटर लंबी अत्याधुनिक सुरंग बनकर तैयार है। यह सुरंग न केवल तकनीक का बेजोड़ नमूना है, बल्कि यह चारधाम आने वाले लाखों तीर्थयात्रियों के लिए समय और सुरक्षा का नया द्वार भी खोलेगी।
2 घंटे की दूरी अब महज 15 मिनट में
पहाड़ों के घुमावदार रास्तों और भूस्खलन के डर के कारण जिस सफर को तय करने में यात्रियों को कम से कम 2 घंटे का समय लगता था, वह दूरी अब इस टनल के जरिए मात्र 15 मिनट में पूरी हो जाएगी। यह सुरंग उन दुर्गम रास्तों का विकल्प बनेगी जहां अक्सर जाम और खराब मौसम के कारण यात्री फंस जाते थे।
चुनौतियों भरा सफर: 4.5 किमी और 3 साल का इंतजार
चारधाम महामार्ग परियोजना की सबसे चुनौतीपूर्ण कड़ी, सिलक्यारा बेंड-बारकोट सुरंग, आखिरकार बनकर तैयार हो गई है। उत्तरकाशी जिले में स्थित यह सुरंग अब गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के बीच की दूरी को न केवल कम करेगी, बल्कि तीर्थयात्रियों के सफर को सुरक्षित और सुगम भी बनाएगी। हिमालय की कच्ची पहाड़ियों में रास्ता बनाना कितना कठिन है, इसका प्रमाण यह है कि महज 4.5 किलोमीटर की इस सुरंग को खोदने में लगभग 3 साल का वक्त लग गया। साल 2023 में शुरू हुई इस खुदाई का हर एक मीटर बाधाओं से भरा था, लेकिन इंजीनियरों और मजदूरों के हौसले ने अंततः आर-पार रास्ता बना ही लिया। इस सुरंग के निर्माण के दौरान नवंबर 2023 में एक भयानक हादसा हुआ था, जब सुरंग का एक हिस्सा ढहने से 41 मजदूर अंदर फंस गए थे। पूरा देश उनकी सलामती की दुआ कर रहा था। करीब 17 दिनों तक चले दुनिया के सबसे जटिल 'रेस्क्यू ऑपरेशन' के बाद सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था। आज यह सुरंग उन्हीं जांबाज मजदूरों के परिश्रम और आधुनिक इंजीनियरिंग का जीता-जागता स्मारक है।
क्यों खास है यह सुरंग ?
यह सुरंग ऑल-वेदर रोड प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिससे भारी बर्फबारी या बारिश के दौरान भी संपर्क नहीं टूटेगा। टनल के अंदर आधुनिक वेंटिलेशन सिस्टम, अग्निशमन यंत्र और सीसीटीवी कैमरों से 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था की गई है। तीर्थयात्रियों के साथ-साथ यह सुरंग सीमावर्ती क्षेत्रों तक सैन्य साजो-सामान पहुंचाने में भी काफी मददगार साबित होगी।
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ