Chardham Yatra 2026 : चारधाम यात्रा में बड़ा बदलाव, यमुनोत्री रूट पर घोड़ा-खच्चरों के लिए सख्त नियम लागू

Edited By Updated: 25 Feb, 2026 10:42 AM

chardham yatra 2026

Chardham Yatra 2026 : इस वर्ष चारधाम यात्रा के दौरान यमुनोत्री धाम के पैदल मार्ग पर घोड़ा-खच्चरों के संचालन को लेकर प्रशासन सख्त रुख अपनाने जा रहा है। जिला प्रशासन की ओर से एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जाएगी, जिसमें पशुओं की...

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Chardham Yatra 2026 : इस वर्ष चारधाम यात्रा के दौरान यमुनोत्री धाम के पैदल मार्ग पर घोड़ा-खच्चरों के संचालन को लेकर प्रशासन सख्त रुख अपनाने जा रहा है। जिला प्रशासन की ओर से एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जाएगी, जिसमें पशुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और देखभाल को प्राथमिकता दी जाएगी। खास तौर पर पशु क्रूरता की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े प्रावधान शामिल किए जाएंगे। साथ ही तय किया गया है कि शाम छह बजे के बाद पैदल मार्ग पर घोड़ा-खच्चरों का संचालन बंद रहेगा।

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने जिला पंचायत और पशुपालन विभाग को संयुक्त रूप से इस संबंध में एसओपी तैयार करने के निर्देश दिए हैं। दोनों विभाग जल्द ही यमुनोत्री पैदल मार्ग का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का आकलन करेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पशुओं के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही या दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को यमुनोत्री धाम तक पहुंचाने के लिए हजारों घोड़े-खच्चरों का उपयोग किया जाता है। पिछले वर्ष लगभग 3600 जानवरों का पंजीकरण किया गया था। आरोप है कि अधिक कमाई के लिए कुछ संचालक पशुओं से जरूरत से ज्यादा काम लेते हैं, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ती है और कई मामलों में मौत भी हो जाती है। इस बार यदि किसी ने तय मानकों से अधिक बोझ या काम लिया तो उसके खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन ने मार्ग में पशुओं के लिए गर्म पानी और चारे की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए हैं। यदि किसी पशु की मृत्यु होती है तो उसके अंतिम निस्तारण के लिए भी तय स्थान चिन्हित किए जाएंगे। संचालन व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए एक समय में अधिकतम 600 घोड़े-खच्चरों को ही ट्रैक पर जाने की अनुमति होगी। इनमें से 100 के वापस लौटने के बाद ही अन्य को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी।

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुरूप एसओपी तैयार की जा रही है, ताकि इस वर्ष यात्रा के दौरान पशुओं की सुरक्षा और व्यवस्थाएं बेहतर ढंग से सुनिश्चित की जा सकें।

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