Diwali: जानें, दीपावली पर देवी लक्ष्मी के साथ विष्णु जी की पूजा क्यों नहीं होती

Edited By Updated: 24 Oct, 2022 10:02 AM

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दीपावली का अर्थ है दीपों की श्रृंखला। दीपावली पर्व कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला दीपों का एक प्राचीन सनातन त्यौहार है। उपनिषदों का

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Deepawali 2022: दीपावली का अर्थ है दीपों की श्रृंखला। दीपावली पर्व कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला दीपों का एक प्राचीन सनातन त्यौहार है। उपनिषदों का कथन है ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’, अर्थात, हे ईश्वर! आप मुझे अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाएं।

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Why is Vishnu not worshipped on Diwali लक्ष्मी जी के साथ विष्णु जी की पूजा क्यों नहीं
वर्ष में केवल दीपावली ही एकमात्र ऐसा मौका है जब लक्ष्मी जी के साथ उनके पति विष्णु जी की पूजा नहीं की जाती। इस संबंध में धर्म-पुराणों में लिखा है कि भगवान विष्णु चातुर्मास के दौरान निद्रालीन होते हैं और दीपावली के बाद देव उठनी एकादशी पर ही जागते हैं। चूंकि दीपावली चातुर्मास के दौरान आती है, अत: उनकी निद्रा भंग न हो, इसीलिए दीपावली के दिन उनका आह्वान-पूजा नहीं की जाती। कार्तिक पूर्णिमा के दिन जब भगवान विष्णु नींद से जागते हैं, तब उस दिन देव दीपावली मनाई जाती है।    

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Deepawali puja दीपावली पर पूजन  
श्री महालक्ष्मी पूजन तथा दीपदान आदि के लिए कार्तिक अमावस में प्रदोष काल एवं अद्र्धरात्रि अमावस का होना विशेष शुभ एवं कल्याणकारी होता है। इस वर्ष दीपावली महापर्व 24 अक्तूबर, सोमवार, कार्तिक अमावस यानी आज मनाई जा रही है। दीपावली पर्व मनाए जाने के समय तिथि अमावस (जो सायं 5.28 पर प्रारंभ होगी), चित्रा नक्षत्र (जो बाद दोपहर 2.42 पर प्रारंभ होगा), विष्कुंभ योग (जो बाद दोपहर 2.32 पर शुरू होगा), कन्या राशिस्थ चंद्रमा (जो 24-25 मध्य रात 2.33 तक तथा तदुपरांत तुला राशि पर) होगा।

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दीपावली के दिन श्री महालक्ष्मी पूजन, कुबेर पूजन, दीपदान, बही-खाता की पोथियों का पूजन, घर में निर्मित मंदिर स्थल, तुलसी पौधा के निकट दीप प्रज्ज्वलित करना, ब्राह्मणों, घर समाज में मौजूद आश्रितों को धन, उपहार, मिष्ठान्न आदि भेंट करना चाहिए। दीपावली पूजन के बाद घर में चौमुखा दीपक रात भर जलता रहना सौभाग्य एवं लक्ष्मी वृद्धि का द्योतक माना जाता है।

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निशीथ-महा निशीथ काल में पूजन जो लोग प्रदोष काल तथा वृष (स्थिर) लग्न में श्री गणेश जी-श्री महालक्ष्मी पूजन न कर सकें, वे निशीथ काल (रात 8.20 से 10.55 तक) में भी कर सकते हैं। किसी कारणवश जो निशीथ काल में महालक्ष्मी पूजन न कर सकें वे महानिशीथ काल (रात 10.56 से 24-25 मध्य रात 1.31 तक) में कर सकते हैं।

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