27 को हरिश्चंद्र और 28 को मणिकर्णिका घाट पर मनाई जाएगी परंपरागत मसाने की होली

Edited By Updated: 26 Feb, 2026 11:38 AM

holi celebrations at harishchandra and manikarnika ghats

वाराणसी की प्रसिद्ध मसाने की होली को लेकर इस बार भी काशी के घाटों पर भारी उत्साह है। जहां पूरी दुनिया रंगों और गुलाल से होली खेलती है, वहीं बनारस में महादेव के भक्त जीवन की नश्वरता को उत्सव बनाते हुए चिता की भस्म से होली खेलते हैं।

Holi Celebrations at Harishchandra and Manikarnika Ghats : वाराणसी की प्रसिद्ध मसाने की होली को लेकर इस बार भी काशी के घाटों पर भारी उत्साह है। जहां पूरी दुनिया रंगों और गुलाल से होली खेलती है, वहीं बनारस में महादेव के भक्त जीवन की नश्वरता को उत्सव बनाते हुए चिता की भस्म से होली खेलते हैं। इस बार काशी में मसान की होली दो अलग-अलग दिनों में दो प्रमुख घाटों पर मनाई जाएगी। 

27 फरवरी 2026 (रंगभरी एकादशी): परंपरा के अनुसार, रंगभरी एकादशी के दिन हरिश्चंद्र घाट पर मसान की होली खेली जाएगी। इस दिन बाबा मसाननाथ की विशेष आरती और श्रृंगार के बाद भक्त भस्म उड़ाएंगे।

28 फरवरी 2026: महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर भव्य रूप में मसान की होली का आयोजन होगा। यहाँ दोपहर की आरती के बाद अघोरी, नागा साधु और स्थानीय बनारसी जलती चिताओं के बीच भस्म से होली खेलेंगे।

परंपरा और मान्यता
माना जाता है कि रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव माता पार्वती का 'गौना' कराकर काशी आए थे, तब उन्होंने अपने भक्तों और देवताओं के साथ गुलाल से होली खेली थी। लेकिन उनके प्रिय गण उस उत्सव में शामिल नहीं हो सके थे। इसलिए, महादेव ने अगले दिन श्मशान में जाकर उनके साथ चिता की भस्म से होली खेली थी। तभी से यह परंपरा 'मसाने की होली' के रूप में प्रसिद्ध हुई।

इस बार क्या होगा खास ?
पालकी यात्रा: दोनों ही घाटों पर बाबा मसाननाथ की भव्य पालकी यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें डमरू दल की थाप पर भक्त झूमते नजर आएंगे।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम: भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने घाटों पर विशेष 'वाटर पुलिस' और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

सांस्कृतिक संगम: इस बार देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए यह आकर्षण का केंद्र होगा, जहां 'खेले मसाने में होरी दिगंबर' के गीतों से पूरी काशी गुंजायमान होगी।

सावधानी: प्रशासन ने अपील की है कि श्रद्धालु जलती चिताओं के बहुत करीब न जाएं और केवल निर्धारित क्षेत्रों में ही उत्सव का आनंद लें।

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