Edited By Sarita Thapa,Updated: 25 Feb, 2026 08:38 AM

उज्जैन की धरती पर होली का रंग सबसे पहले बाबा महाकाल के आंगन में बिखरता है। इस साल कैलेंडर की तारीखों और चंद्र ग्रहण को लेकर भक्तों में जो संशय था, उसे महाकाल मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित महेश शर्मा ने दूर कर दिया है।
Ujjain Mahakal Mandir News : उज्जैन की धरती पर होली का रंग सबसे पहले बाबा महाकाल के आंगन में बिखरता है। इस साल कैलेंडर की तारीखों और चंद्र ग्रहण को लेकर भक्तों में जो संशय था, उसे महाकाल मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित महेश शर्मा ने दूर कर दिया है। पुजारी जी ने स्पष्ट किया है कि मंदिर की प्राचीन परंपराएं पंचांग के गणित से ऊपर हैं, इसलिए यहां होली का पर्व निर्धारित परंपरा के अनुसार ही मनाया जाएगा।
तारीख का निर्णय: महाकालेश्वर मंदिर में होली का उत्सव 2 मार्च और 3 मार्च को मनाया जाएगा।
होलिका दहन: मंदिर परिसर में 2 मार्च 2026 की शाम को संध्या आरती के बाद पारंपरिक रूप से होलिका दहन किया जाएगा। इस दौरान बाबा महाकाल को हर्बल गुलाल अर्पित किया जाएगा और शक्कर की माला पहनाई जाएगी।
भस्म आरती में होली: 3 मार्च 2026 की सुबह होने वाली प्रसिद्ध 'भस्म आरती' में बाबा महाकाल के साथ अबीर-गुलाल की होली खेली जाएगी।
पुजारी का क्या कहना है ?
महाकाल मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लग रहा है, लेकिन बाबा महाकाल के दरबार में ग्रहण का सूतक या प्रभाव उत्सव को नहीं रोकता। मंदिर की परंपरा के अनुसार, यहां सबसे पहले त्योहार मनाया जाता है। ग्रहण काल के दौरान केवल गर्भगृह में विशेष पूजा निषिद्ध रहती है, लेकिन दर्शन की व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहती है। उन्होंने साफ किया कि श्रद्धालुओं को किसी भ्रम में पड़ने की जरूरत नहीं है; मंदिर प्रशासन ने 2 मार्च को होलिका दहन और 3 मार्च को रंग वाली होली मनाने का निर्णय लिया है।
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