Edited By Niyati Bhandari,Updated: 23 Aug, 2023 08:07 AM

एक बार किसी संत के आश्रम में किसी शिष्य की कोई चीज चोरी हो गई। जांच-पड़ताल में चोर का पता चल गया। चोर संत का एक नया शिष्य था
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Inspirational Context: एक बार किसी संत के आश्रम में किसी शिष्य की कोई चीज चोरी हो गई। जांच-पड़ताल में चोर का पता चल गया। चोर संत का एक नया शिष्य था। अन्य शिष्यों ने सोचा कि गुरु जी उसे आश्रम से निकाल देंगे लेकिन गुरु जी ने कुछ नहीं किया। कुछ दिन बाद वही शिष्य फिर से कुछ चुराते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। संत के सामने पेशी हुई।

लेकिन उन्होंने कहा, “छोड़ दो इसे, सुधर जाएगा।”
संत की इस दया पर अन्य शिष्य नाराज हुए और बोले, “गुरुदेव ऐसा चोर हम सबको बदनाम कर डालेगा। इसे आश्रम से निकाल दीजिए।”
संत बड़े सहज भाव से बोले, “तुम सब समझदार हो। अच्छे-बुरे का फर्क समझते हो। अगर मैं तुम्हें निकाल दूं तो भी तुम ध्यान-साधना के रास्ते पर चलते रहोगे लेकिन यह बेचारा नासमझ है, इसे सही-गलत का फर्क तक नहीं मालूम। इसे तो ज्यादा से ज्यादा सिखाने की जरूरत है। इसे कैसे निकाल दूं।”

यह सुनकर शिष्य चुप हो गए। चोरी करने वाले शिष्य की आंखों से अश्रुधारा बहने लगी और उसका मन निर्मल हो गया। उस दिन के बाद से वह एक बेहद संयमी साधक के रूप में विकसित हुआ।
