Edited By Sarita Thapa,Updated: 02 Jan, 2026 02:28 PM

एक राजा अपने मंत्री के साथ शिकार पर गए। वन में हिरन को देख राजा ने तीर प्रत्यंचा पर चढ़ाया ही था कि जंगल में से एक सूअर निकला और राजा को धक्का देकर भागा।
Best Motivational Story : एक राजा अपने मंत्री के साथ शिकार पर गए। वन में हिरन को देख राजा ने तीर प्रत्यंचा पर चढ़ाया ही था कि जंगल में से एक सूअर निकला और राजा को धक्का देकर भागा। अचानक धक्का लगने के कारण तीर की नोक से उनकी उंगली कट गई। रक्त बहने लगा।
राजा की उंगली से खून बहता देखकर मंत्री बोले, ‘‘राजन! भगवान की मर्जी, वह जो करता है अच्छे के लिए करता है। ’’
राजा काफी पीड़ा में थे। मंत्री की बात सुनकर क्रोध से भर उठे। उन्होंने मंत्री को आज्ञा दी कि वह उसी समय उनका साथ छोड़ अन्य राह पकड़ लें। मंत्री ने आदेश को खुशी-खुशी स्वीकार किया और दूसरी दिशा में निकल पड़े।
इधर राजा थोड़ा आगे बढ़े ही थे कि उन्हें जंगल में नरभक्षी कबीले के लोगों ने घेर लिया। वे उन्हें पकड़कर अपने सरदार के पास ले चले। राजा की बलि देने की तैयारी हो रही थी कि कबीले के पुजारी ने राजा की कटी उंगली देखकर कहा ‘‘इसका तो अंग भंग है, इसकी बलि स्वीकार नहीं हो सकती।’’

राजा को जीवनदान मिला तो उन्हें तुरन्त मंत्री की याद आई। सोचने लगे कि मंत्री ठीक कहते थे, ‘‘भगवान जो करता है, अच्छे के लिए करता है। मुझे उनका साथ नहीं छोड़ना चाहिए था।’’
ऐसा सोचते वे आगे बढ़ रहे थे कि उन्हें मंत्री नदी किनारे भजन करते दिखाई पड़े। राजा ने मंत्री को सारा घटनाक्रम कह सुनाया। इसके बाद राजा ने उनसे प्रश्र किया, ‘‘मेरी उंगली कटी, इसमें भगवान ने मेरा भला किया, पर तुम्हें मैंने अपमानित करके भगाया, इससे भला तुम्हारा क्या भला हुआ?’’
मंत्री मुस्कुराए और बोले, ‘‘राजन! यदि आपने मुझे अलग राह पर न भेजा होता और मैं आपके साथ होता तो अंग-भंग के कारण नरभक्षी आपकी बलि न देते, पर मेरी बलि चढ़नी तय थी। इसलिए भगवान जो करते हैं, अच्छा ही करते हैं।’’

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