Edited By Sarita Thapa,Updated: 07 Jan, 2026 03:54 PM

एक राजा किसी गांव में घूम रहा था। वहां उसे एक जगह बहुत पसंद आई और उसने वहां पर अपने लिए एक आलीशान महल बनवाने का निश्चय किया। कुछ ही माह में महल बनकर तैयार हो गया। राजा और उसके परिवार ने उस महल में आकर रहना शुरू कर दिया।
Inspirational Context : एक राजा किसी गांव में घूम रहा था। वहां उसे एक जगह बहुत पसंद आई और उसने वहां पर अपने लिए एक आलीशान महल बनवाने का निश्चय किया। कुछ ही माह में महल बनकर तैयार हो गया। राजा और उसके परिवार ने उस महल में आकर रहना शुरू कर दिया। उसी महल के सामने एक पुरानी झोंपड़ी थी, जिसमें एक बूढ़ी महिला रहती थी। सुबह-सुबह जब राजा, रानी और उनके बच्चे उठते तो उन्हें सबसे पहले बुढ़िया और उसकी झोंपड़ी नजर आती, जिसे देखकर उनका मन दुखी हो जाता।
कुछ दिन बाद राजा ने अपने सिपाहियों को बुलाकर कहा कि बुढ़िया को कुछ धन देकर कहो कि वह अपनी झोंपड़ी यहां से हटा ले। सिपाही महिला के पास गए तो उसने किसी भी कीमत पर वहां से जाने से इंकार कर दिया। वे उसे पकड़कर राजा के पास ले आए। राजा ने उसे समझाया कि उसे राजा की आज्ञा का पालन करना चाहिए। वह चाहे तो उसकी झोंपड़ी जबरदस्ती भी वहां से हटवा सकता है।
इस पर बुढ़िया बोली कि आप समर्थ हैं जो चाहे कर सकते हैं लेकिन इतना तो सोचिए कि जब मैं आपका इतना विशाल महल, बाग-बगीचे सब देख सकती हूं तो मेरी छोटी-सी झोंपड़ी आपकी आंखों में क्यों खटकती है?
आपके पास ताकत है, लेकिन उसे एक कमजोर पर प्रयोग करने से क्या आपको अपशय नहीं लगेगा? यह सुनकर राजा बहुत लज्जित हुआ और उसने क्षमा-याचना कर उसे ससम्मान वहां से विदा किया।
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ