Edited By Niyati Bhandari,Updated: 12 Aug, 2026 10:10 AM

जैन धर्म को किताबों और विश्वविद्यालयों की कक्षाओं में पढ़ने वाले करीब 30 विद्वानों और शोधार्थियों ने इस बार राजस्थान के लाडनूं में इसकी जीवंत परंपरा को करीब से समझने का अनोखा अनुभव हासिल किया।
नई दिल्ली (इंट): जैन धर्म को किताबों और विश्वविद्यालयों की कक्षाओं में पढ़ने वाले करीब 30 विद्वानों और शोधार्थियों ने इस बार राजस्थान के लाडनूं में इसकी जीवंत परंपरा को करीब से समझने का अनोखा अनुभव हासिल किया।
अमरीका, यूरोप समेत 8 देशों से आए प्रतिभागियों ने जैन ग्रंथों का अध्ययन करने के साथ साधु-साध्वियों के साथ समय बिताया, ध्यान किया और रोजमर्रा के जीवन में जैन दर्शन के सिद्धांतों को समझने की कोशिश की।
किताबी ज्ञान से आगे बढ़ा अध्ययन
लाडनूं में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय समर प्रोग्राम में प्रतिभागियों को सिर्फ जैन धर्म के सिद्धांतों और ग्रंथों की जानकारी नहीं दी गई, बल्कि उन्हें उस जीवनशैली का प्रत्यक्ष अनुभव कराया गया, जिसके आधार पर जैन दर्शन विकसित हुआ है।
कार्यक्रम के दौरान प्राकृत, संस्कृत, पांडुलिपियों और जैन दर्शन का अध्ययन कराया गया। इसके साथ ही प्रतिभागियों ने प्रेक्षा ध्यान का अभ्यास किया और साधु-साध्वियों से संवाद भी किया।
ध्यान से लेकर धार्मिक अनुष्ठानों तक भागीदारी
विद्वानों ने प्रेक्षा ध्यान का अभ्यास किया। इसके अलावा उन्हें धार्मिक समारोहों में शामिल होने और जैन परंपराओं को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिला।
कार्यक्रम का उद्देश्य यह था कि प्रतिभागी जैन धर्म को केवल एक अकादमिक विषय के रूप में न देखें, बल्कि उसके दर्शन और जीवन-पद्धति के बीच संबंध को भी समझें।