Edited By Prachi Sharma,Updated: 10 Jan, 2026 03:33 PM

Kabir Das Ji Story : एक धनवान व्यक्ति कबीर की अमृतवाणी सुनने रोजाना जाया करता था। उस व्यक्ति को यह जानने की बड़ी उत्सुकता थी कि उनकी वाणी में ऐसा क्या है जो लोग इन्हें इतना महत्व देते हैं ? एक दिन प्रवचन के दौरान उसकी नजर कबीर दास के कुर्ते पर पड़ी,...
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Kabir Das Ji Story : एक धनवान व्यक्ति कबीर की अमृतवाणी सुनने रोजाना जाया करता था। उस व्यक्ति को यह जानने की बड़ी उत्सुकता थी कि उनकी वाणी में ऐसा क्या है जो लोग इन्हें इतना महत्व देते हैं ? एक दिन प्रवचन के दौरान उसकी नजर कबीर दास के कुर्ते पर पड़ी, जोकि बहुत ही साधारण था। उसने कबीर दास को एक कुर्ता भेंट करने का निश्चय किया।
धनी व्यक्ति ने कुछ दिनों के बाद मखमल का एक कुर्ता कबीर दास को भेंट कर दिया। कुर्ते की विशेषता यह थी कि उसका बाहर दिखने वाला कपड़ा मुलायम था और अंदर दूसरी तरफ साधारण कपड़ा लगा हुआ था। कबीर दास ने धनी व्यक्ति का उपहार स्वीकार कर लिया। अगले दिन जब प्रवचन शुरू हुए तो कबीर दास ने वही कुर्ता पहना हुआ था, लेकिन उन्होंने कुर्ता उलटा पहना हुआ था, यानी कि मुलायम वाला हिस्सा शरीर को छू रहा था और साधारण हिस्सा बाहर दिख रहा था।
प्रवचन समाप्त होने के बाद उस धनी व्यक्ति ने पूछा, ‘‘यह आपने क्या किया ? कुर्ता ऐसे कैसे पहना है ?’’ तब सभी के सामने कबीर दास ने बताया कि यह कुर्ते की भेंट इन्हीं धनी व्यक्ति ने की है। कुर्ता उलटा पहनने पर कबीर बोले कपड़े शरीर की उपयोगिता के लिए होते हैं, दिखावे के लिए नहीं। मुलायम भाग शरीर को स्पर्श होना चाहिए था इसलिए इसे उलटा पहना है। दिखाने के लिए तो साधारण हिस्सा ही काफी है।
धनी व्यक्ति और अन्य लोगों को यह बात समझ में आ गई कि कबीर दास जो बोलते हैं, उसे अपने जीवन में उतारते भी हैं।