Edited By Sarita Thapa,Updated: 19 Oct, 2026 11:00 AM

सनातन धर्म में शारदीय नवरात्रि का बहुत खास महत्व है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है। नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन करनमे की परंपरा है।
Kanya Pujan Langur Worship Reason : सनातन धर्म में शारदीय नवरात्रि का बहुत खास महत्व है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है। नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन करनमे की परंपरा है। इस दिन छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें भोजन कराया जाता है। आपने अक्सर देखा होगा कि कन्या पूजन के दौरान कन्याओं के साथ एक बालक भी भोजन के लिए आमंत्रित किया जाता है। कई स्थानों पर इस बालक को लंगूर या बटुक भैरव के स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कन्या पूजन में बटुक भैरव को शामिल करने के पीछे क्या धार्मिक मान्यता है।
कन्या पूजन में लंगूर को क्यों किया जाता है शामिल?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन में छोटी बच्चियों को मां दुर्गा का प्रतीक माना जाता है, जबकि बालक को भैरव बाबा के स्वरूप के रूप में सम्मान दिया जाता है। यही वजह है कि कई परिवारों में कन्याओं के साथ एक बालक को भी भोजन कराया जाता है। उसे लंगूर या बटुक भैरव कहकर संबोधित किया जाता है। मान्यता है कि मां दुर्गा की पूजा भैरव बाबा के स्मरण के बिना अधूरी मानी जाती है। इसी आस्था के चलते कन्या पूजन के दौरान बालक को भी विशेष स्थान दिया जाता है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इस परंपरा को निभाने के तरीके अलग हो सकते हैं।
कौन हैं बटुक भैरव?
धार्मिक मान्यताओं में बटुक भैरव को भगवान शिव के बाल स्वरूप से जोड़कर देखा जाता है। उन्हें भगवान भैरव का बाल रूप माना जाता है। भैरव बाबा को शक्ति, साहस और रक्षा का प्रतीक माना जाता है। भक्त उनकी पूजा करके परिवार की सुख-शांति और सुरक्षा की कामना करते हैं। बटुक भैरव की पूजा विशेष रूप से देवी उपासना से जुड़ी परंपराओं में महत्वपूर्ण मानी जाती है। नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के साथ भैरव बाबा का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है। कन्या पूजन में बालक को बटुक भैरव का प्रतीक मानकर सम्मान देने की परंपरा इसी धार्मिक विश्वास से जुड़ी है।
कन्या पूजन का धार्मिक महत्व
नवरात्रि में कन्या पूजन को नारी शक्ति के सम्मान और मां दुर्गा के प्रति भक्ति प्रकट करने का माध्यम माना जाता है। इस दिन छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी सेवा और सत्कार किया जाता है। वहीं, बटुक भैरव के प्रतीक के रूप में बालक को भोजन कराना देवी उपासना से जुड़ी एक प्रचलित धार्मिक परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया कन्या पूजन भक्तों को आत्मिक संतोष प्रदान करता है। इस अवसर पर जरूरतमंदों की सहायता करना, बच्चों का सम्मान करना और सभी के प्रति प्रेमपूर्ण व्यवहार रखना भी पूजा की भावना को सार्थक बनाता है।
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