Edited By Sarita Thapa,Updated: 28 Jan, 2026 08:43 AM

धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में बाबा विश्वनाथ के चरणों में अर्पित किए जाने वाले फूलों को लेकर एक नई बहस और व्यवस्था चर्चा में है। मंदिर प्रशासन और स्थानीय स्तर पर अब इस बात पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि महादेव को चढ़ने वाले फूल न केवल ताजे हों,...
Kashi Vishwanath Temple Flower Controversy : धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में बाबा विश्वनाथ के चरणों में अर्पित किए जाने वाले फूलों को लेकर एक नई बहस और व्यवस्था चर्चा में है। मंदिर प्रशासन और स्थानीय स्तर पर अब इस बात पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि महादेव को चढ़ने वाले फूल न केवल ताजे हों, बल्कि उनकी धार्मिक शुचिता भी पूरी तरह से कायम रहे। हालिया घटनाक्रमों और चर्चाओं के अनुसार, बाबा भोलेनाथ को चढ़ाए जाने वाले फूलों की खेती और उनकी आपूर्ति करने वालों की पहचान को लेकर सतर्कता बढ़ाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य मंदिर की सदियों पुरानी परंपराओं और सनातन मर्यादाओं का पालन सुनिश्चित करना है।
काशी में फूलों की आपूर्ति करने वाले बागवानों और व्यापारियों की साख को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए गए थे। मांग की जा रही है कि मंदिर की पवित्रता को देखते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि फूलों की खेती और उन्हें तोड़ने की प्रक्रिया सनातन मूल्यों के अनुरूप हो। इसी संदर्भ में यह बात सामने आई है कि आपूर्ति श्रृंखला में अब फूलों की जड़ों और उगाने वालों की पृष्ठभूमि पर नजर रखी जाएगी, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस न पहुंचे।
परंपरा और शुद्धता पर जोर
काशी के विद्वानों और पुजारियों का मानना है कि महादेव को अर्पित की जाने वाली हर वस्तु सात्विक और 'शुद्ध' होनी चाहिए। फूलों के चयन में अब यह देखा जा रहा है कि वे शास्त्रोक्त विधि से उगाए गए हों। प्रशासन और मंदिर से जुड़े लोग इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि बाबा के दरबार में फूल भेजने वाले लोग कौन हैं और वे किन बागानों से आ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई कि फूलों की पहचान परखी जाएगी, सोशल मीडिया से लेकर काशी की गलियों तक बहस तेज हो गई है। एक पक्ष इसे मंदिर की मर्यादा और शुद्धता के लिए जरूरी कदम बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे व्यवस्थागत बदलाव के रूप में देख रहा है।
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