Edited By Prachi Sharma,Updated: 23 Feb, 2026 02:39 PM

Falgun Purnima 2026 : हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि का आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत विशेष महत्व है। वर्ष 2026 में 3 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा मनाई जाएगी। यह वही पावन तिथि है जब बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक...
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
Falgun Purnima 2026 : हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि का आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत विशेष महत्व है। वर्ष 2026 में 3 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा मनाई जाएगी। यह वही पावन तिथि है जब बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक स्वरूप होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन रंगों का त्योहार होली मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा तिथि माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि इस दिन समुद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। यदि फाल्गुन पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी को उनकी प्रिय वस्तुओं का भोग लगाया जाए तो घर में सुख-समृद्धि, धन और वैभव का वास होता है। आइए जानते हैं उन 5 विशेष चीजों के बारे में, जिनका भोग लगाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाती हैं।
केसर युक्त खीर
मां लक्ष्मी को सफेद रंग और दूध से बनी वस्तुएं अत्यधिक प्रिय हैं। खीर को अमृत के समान माना गया है। फाल्गुन पूर्णिमा की रात को केसर और ड्राई फ्रूट्स डालकर बनाई गई खीर का भोग लगाने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है और मानसिक शांति मिलती है। यदि संभव हो तो खीर को चांदी के पात्र में अर्पित करें। भोग लगाने के बाद इस खीर को परिवार के सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांटें। इससे परिवार के बीच प्रेम बढ़ता है।
मखाना
मखाने का संबंध सीधे तौर पर जल और कमल से है। चूंकि मां लक्ष्मी कमला हैं और कमल के पुष्प पर विराजमान रहती हैं इसलिए मखाना उन्हें प्रिय है। मखाने को घी में भूनकर या खीर में डालकर माता को अर्पित करें। वास्तु और ज्योतिष के अनुसार, मखाने का भोग लगाने से घर की दरिद्रता दूर होती है और आय के नए स्रोत बनते हैं।
पीला फल और केला
पीला रंग श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों को प्रिय है। फाल्गुन पूर्णिमा पर फलों का भोग लगाना सात्विकता का प्रतीक है। केले का फल विष्णु प्रिया को बहुत प्रिय है। ध्यान रहे कि हमेशा केले का जोड़ा ही अर्पित करना चाहिए। आप पीले रंग के अन्य मीठे फल भी चढ़ा सकते हैं। यह जीवन में मिठास और सकारात्मकता का संचार करता है।

बताशा और मिश्री
चंद्रमा का संबंध शीतलता और मिठास से है। पूर्णिमा की रात जब चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ उदित होता है, तब बताशा और मिश्री का भोग अत्यंत शुभ माना जाता है। बताशे शुक्र ग्रह का प्रतीक माने जाते हैं, जो वैभव और विलासिता के कारक हैं। मां लक्ष्मी को सफेद बताशे चढ़ाने से शुक्र दोष दूर होता है और आर्थिक तंगी से राहत मिलती है।
नारियल
संस्कृत में नारियल को श्रीफल कहा जाता है, जिसका अर्थ है लक्ष्मी का फल। फाल्गुन पूर्णिमा की पूजा बिना नारियल के अधूरी मानी जाती है। मां लक्ष्मी को जटा वाला नारियल या पानी वाला नारियल अर्पित करना चाहिए। पूजा के बाद इस नारियल को तिजोरी में रखने या प्रसाद स्वरूप ग्रहण करने से घर में संचित धन की वृद्धि होती है।
