Edited By Prachi Sharma,Updated: 08 Jan, 2026 07:47 AM

Magh Mela 2026 : सनातन परंपरा में माघ मास को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। विशेष रूप से प्रयागराज में आयोजित होने वाला माघ मेला श्रद्धा, तपस्या, दान और पवित्र स्नान का अनुपम संगम माना जाता है। इस वर्ष पौष पूर्णिमा के शुभ दिन से माघ मेले का आगाज हो...
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Magh Mela 2026 : सनातन परंपरा में माघ मास को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। विशेष रूप से प्रयागराज में आयोजित होने वाला माघ मेला श्रद्धा, तपस्या, दान और पवित्र स्नान का अनुपम संगम माना जाता है। इस वर्ष पौष पूर्णिमा के शुभ दिन से माघ मेले का आगाज हो चुका है। खास बात यह है कि करीब 75 वर्षों बाद एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है, जिसके कारण इस बार के आयोजन को साधारण माघ मेला नहीं, बल्कि ‘महामाघ मेला’ कहा जा रहा है। इसी वजह से यह आयोजन ऐतिहासिक महत्व भी रखता है। शास्त्रों में वर्णित है कि माघ मास में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर किया गया स्नान मोक्ष प्रदान करने वाला होता है। वर्ष 2026 में माघ मेला 3 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी को महाशिवरात्रि तक चलेगा।
स्नान घाटों का दायरा बढ़ाया जा रहा
पौष पूर्णिमा से माघ मेले की विधिवत शुरुआत हो चुकी है। अब अगला प्रमुख स्नान पर्व 15 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन होगा, जिसके बाद 18 जनवरी को मौनी अमावस्या का सबसे बड़ा स्नान पर्व पड़ेगा। इन दोनों महत्वपूर्ण अवसरों को देखते हुए प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पौष पूर्णिमा तक जहां करीब 7000 फीट तक स्नान घाट तैयार किए गए थे, वहीं मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए अब घाटों का विस्तार कर उन्हें लगभग 9000 फीट तक बढ़ाया जा रहा है।
घाटों की सफाई और संगम नोज का विस्तार
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए संगम नोज क्षेत्र का भी विस्तार किया जा रहा है, ताकि अधिक संख्या में लोग एक साथ स्नान कर सकें। मेला अधिकारी ऋषि राज के निर्देशन में यह कार्य तेजी से किया जा रहा है। इसके साथ ही घाटों पर जमा सिल्ट को हटाने के लिए डिसिल्ट्रेशन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। पोकलेन और जेसीबी मशीनों की मदद से घाटों की नियमित सफाई की जा रही है, जिससे स्नान के दौरान श्रद्धालुओं को पर्याप्त और सुरक्षित स्थान मिल सके।