Maha Shivaratri 2026 : महाकाल मंदिर में होगा 10 दिन का शिव उत्सव, जानिए हर दिन क्या होगा ?

Edited By Updated: 02 Feb, 2026 05:32 PM

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Maha Shivaratri 2026 : हिंदू परंपरा में नवरात्रि को अत्यंत पुण्यदायी पर्व माना जाता है। आम तौर पर देशभर में नवरात्रि वर्ष में चार बार आती है, लेकिन धर्म और आस्था की नगरी उज्जैन में यह पर्व एक विशेष परंपरा के तहत पांच बार मनाया जाता है। उज्जैन स्थित...

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Maha Shivaratri 2026 : हिंदू परंपरा में नवरात्रि को अत्यंत पुण्यदायी पर्व माना जाता है। आम तौर पर देशभर में नवरात्रि वर्ष में चार बार आती है, लेकिन धर्म और आस्था की नगरी उज्जैन में यह पर्व एक विशेष परंपरा के तहत पांच बार मनाया जाता है। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, जो देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में तीसरे स्थान पर विराजमान है, अपनी अलग धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां अन्य स्थानों की तरह शिवरात्रि नहीं, बल्कि शिव नवरात्रि का आयोजन होता है। इस दौरान भगवान महाकाल नौ दिनों तक अलग-अलग स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देते हैं। इस वर्ष शिव नवरात्रि महोत्सव 6 फरवरी से 15 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। विशेष बात यह है कि इस बार यह उत्सव नौ नहीं बल्कि पूरे दस दिनों तक श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा।

महाकाल की दिव्य पूजा का क्रम

6 फरवरी:
शिव नवरात्रि के पहले दिन, कोटितीर्थ पर स्थित श्री कोटेश्वर महादेव का पूजन किया जाएगा। मुख्य पुजारी पं. घनश्याम शर्मा के मार्गदर्शन में 11 ब्राह्मण देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए रूद्राभिषेक करेंगे।

7 फरवरी:
दूसरे दिन, भगवान महाकाल को नवीन वस्त्र धारण कर श्रृंगारित किया जाएगा। भक्तगण इस दिन उनके दर्शन और पूजा-अर्चना में सम्मिलित होंगे।

8 फरवरी:
तीसरे दिन, भगवान महाकाल शेषनाग धारण करेंगे। इस अवसर पर एकादश-एकादशनी रूद्रपाठ का अभिषेक होगा। शाम के समय भगवान को नए वस्त्र और आभूषण पहनाए जाएंगे।

9 फरवरी:
चौथे दिन घटाटोप शृंगार होगा। भक्त महाकाल के दर्शन करेंगे, और उन्हें कटरा, मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुण्डमाल, छत्र और फलों की माला पहनाई जाएगी।

10 फरवरी:
पाँचवे दिन भगवान महाकाल छबीना स्वरूप धारण करेंगे। प्रातः को नैवैद्य कक्ष में श्री चंद्र मौलेश्वर का पूजन होगा और कोटितीर्थ कुंड के पास कोटेश्वर महादेव की पूजा के बाद भगवान को नवीन पीले वस्त्र पहनाए जाएंगे।

11 फरवरी:
छठे दिन होलकर शृंगार किया जाएगा। इस दिन प्रातः श्री चंद्रमोलेश्वर का पूजन होगा। शाम के समय भगवान महाकाल को नए वस्त्र और मुकुट, मुण्डमाल और फलों की माला पहनाई जाएगी।

12 फरवरी:
सातवें दिन मनमहेश शृंगार होगा। बाबा महाकाल उमा-महेश स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे। कोटितीर्थ कुंडे के पास पूजा-अर्चना के बाद उन्हें कत्थई रंग के वस्त्र पहनाए जाएंगे।

13 फरवरी:
आठवें दिन उमा-महेश शृंगार होगा। इस दिन महाकाल ने होल्कर स्वरूप धारण किया। उन्हें लाल रंग के वस्त्र पहनाए जाएंगे, साथ ही मुकुट, मुण्डमाल और फलों की माला भी पहनाई जाएगी।

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