काशी विश्वनाथ की पांच आरतियों का दिव्य रहस्य, जानें मंगला से शयन आरती तक का आध्यात्मिक महत्व

Edited By Updated: 07 Feb, 2026 11:53 AM

five aartis of kashi vishwanath

मोक्ष की नगरी काशी के बारे में कहा जाता है कि यहां कण-कण में शिव का वास है। लेकिन बाबा विश्वनाथ के दरबार में होने वाली पांच प्रहर की आरतियां इस पूरी सृष्टि के संचालन का एक सूक्ष्म आध्यात्मिक स्वरूप हैं।

Five Aartis of Kashi Vishwanath : मोक्ष की नगरी काशी के बारे में कहा जाता है कि यहां कण-कण में शिव का वास है। लेकिन बाबा विश्वनाथ के दरबार में होने वाली पांच प्रहर की आरतियां इस पूरी सृष्टि के संचालन का एक सूक्ष्म आध्यात्मिक स्वरूप हैं। ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली मंगला आरती से लेकर रात्रि की अंतिम शयन आरती तक, प्रत्येक अनुष्ठान का अपना एक विशिष्ट अर्थ, ऊर्जा और वैज्ञानिक महत्व है।
इन आरतियों के माध्यम से न केवल जीव का शिव से मिलन होता है, बल्कि यह मानव जीवन के पांच महत्वपूर्ण चरणों- जन्म, कर्म, भक्ति, उत्सव और अंततः शांति को भी दर्शाती हैं। माना जाता है कि जो भक्त इन पांचों आरतियों के दिव्य रहस्य को समझ लेता है, उसे जीवन-मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है। डमरू की गूंज, वेदमंत्रों का पाठ और गंगा की लहरों के बीच होने वाली यह आध्यात्मिक यात्रा भक्त को एक अलग ही संसार में ले जाती है, जहां केवल शिवत्व का अनुभव होता है।

मंगला आरती (भोर की प्रथम किरण)
समय: सुबह 3:00 से 4:00 बजे के बीच।

रहस्य: यह आरती 'सृष्टि के उदय' का प्रतीक है। ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली इस आरती में बाबा को निद्रा से जगाया जाता है। इस समय बाबा का निराकार से साकार रूप में श्रृंगार होता है।

महत्व: माना जाता है कि मंगला आरती के दर्शन से व्यक्ति की सोई हुई किस्मत जाग जाती है और उसे पूरे दिन के लिए नई आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

भोग आरती (दोपहर का मध्यान भोजन)
समय: सुबह 11:15 से दोपहर 12:20 बजे के बीच।

रहस्य: यह जीवन के पोषण का प्रतीक है। इस समय बाबा को राजसी व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। भक्त बाबा से प्रार्थना करते हैं कि समस्त संसार में कोई भूखा न रहे।

महत्व: जो भक्त इस आरती में शामिल होते हैं, उनके घर में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती। यह 'अन्नपूर्णा' और 'शिव' के एकाकार होने का समय है।

संध्या आरती (सूर्यास्त की बेला)
समय: शाम 7:00 से 8:15 बजे के बीच।

रहस्य: यह 'शक्ति और वैराग्य' का संगम है। दिन ढलने के साथ बाबा का भव्य श्रृंगार किया जाता है। डमरू, शंख और घंटों की गूंज से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठता है।

महत्व: यह आरती मन के विकारों और नकारात्मकता को नष्ट करने वाली मानी जाती है।

श्रृंगार आरती (रात्रि का भव्य उत्सव)
समय: रात 9:00 से 10:15 बजे के बीच।

रहस्य: इसे 'सौंदर्य और आनंद' की आरती कहा जाता है। इस दौरान बाबा विश्वनाथ को विशेष फूलों से सजाया जाता है। यह शिव के उस रूप को दर्शाता है जो उत्सव प्रिय हैं।

महत्व: इस आरती के दर्शन से पारिवारिक सुख और मानसिक शांति प्राप्त होती है। यह सांसारिक दुखों को भुलाकर शिव के आनंद में डूबने का समय है।

शयन आरती (विश्राम और विलय)
समय: रात 10:30 से 11:00 बजे के बीच।

रहस्य: यह 'प्रलय और शांति' का प्रतीक है। दिन भर की समस्त गतिविधियों के बाद बाबा को निद्रा की ओर ले जाया जाता है। इस दौरान शिव तांडव स्तोत्र या शांति पाठ किया जाता है।

महत्व: यह आरती हमें याद दिलाती है कि अंत में सब कुछ शिव में ही विलीन होना है। शयन आरती के दर्शन से मृत्यु का भय दूर होता है और साधक को गहरी शांति का अनुभव होता है।

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