Edited By Niyati Bhandari,Updated: 09 Jan, 2026 07:58 AM

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति को उत्तर भारत में खिचड़ी पर्व के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश के साथ दान-पुण्य, स्नान और सूर्य उपासना का विशेष महत्व होता है। लेकिन साल 2026 में मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी एक...
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति को उत्तर भारत में खिचड़ी पर्व के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश के साथ दान-पुण्य, स्नान और सूर्य उपासना का विशेष महत्व होता है। लेकिन साल 2026 में मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही दिन, 14 जनवरी को पड़ रही है। यही कारण है कि श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस दिन खिचड़ी का दान करना उचित होगा या नहीं।

14 जनवरी 2026 को बन रहा है दुर्लभ धार्मिक संयोग
हिंदू पंचांग के अनुसार, बुधवार 14 जनवरी 2026 को सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी दिन माघ मास के कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी भी है। मकर संक्रांति सूर्य उपासना और दान का पर्व है, जबकि एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित व्रत तिथि मानी जाती है। जब दोनों पर्व एक साथ आते हैं, तो नियमों का पालन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

एकादशी के दिन चावल क्यों होता है वर्जित
धर्मशास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि एकादशी के दिन चावल का सेवन और दान वर्जित माना गया है। मान्यता है कि एकादशी तिथि पर चावल का प्रयोग करने से व्रत का फल नष्ट हो सकता है। चूंकि खिचड़ी में चावल मुख्य सामग्री होती है, इसलिए इस दिन इसके दान को लेकर भ्रम की स्थिति बनती है।

क्या मकर संक्रांति 2026 पर खिचड़ी दान करना चाहिए?
ज्योतिषाचार्यों और धर्मशास्त्रों के अनुसार, 14 जनवरी 2026 को चावल से बनी खिचड़ी का दान नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह एकादशी नियमों के विरुद्ध होगा। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं कि मकर संक्रांति का दान पूरी तरह रोक दिया जाए।

शुभ विकल्प क्या हैं?
यदि आप दोनों पर्वों का पुण्य प्राप्त करना चाहते हैं, तो इन उपायों को अपनाएं—
तिल, गुड़, घी, कंबल, वस्त्र और तिल से बनी खिचड़ी का दान करें।
खिचड़ी का दान द्वादशी तिथि (15 जनवरी 2026) को करें।
एकादशी पर विष्णु पूजन और षटतिला एकादशी व्रत रखें।
इस प्रकार आप शास्त्रों के नियमों का पालन करते हुए पूर्ण पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।
मकर संक्रांति 2026 में दान का महत्व बना रहेगा, लेकिन एकादशी के कारण चावल का त्याग करना ही शास्त्रसम्मत उपाय है। सही तिथि और सही वस्तु का दान करने से सूर्य देव और भगवान विष्णु दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
