Smile please: ओशो से जानें, जीवन जीने का उत्तम तरीका

Edited By Updated: 22 Feb, 2022 01:42 PM

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बुद्ध के बाबत कहा जाता है कि ज्ञान प्राप्त होने के बाद सबसे पहले वह जोर से हंसे। बार-बार उनसे पूछा गया कि वह हंसे क्यों? हंसने का कोई प्रकट कारण न था।

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Osho World: बुद्ध के बाबत कहा जाता है कि ज्ञान प्राप्त होने के बाद सबसे पहले वह जोर से हंसे। बार-बार उनसे पूछा गया कि वह हंसे क्यों? हंसने का कोई प्रकट कारण न था। 

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उन्होंने कहा ‘‘मैं हंसा क्योंकि मैं स्वयं की खोज कर रहा था और मैं अपने भीतर के सिवाय हर जगह खोज रहा था।’’

जब तुम वास्तव में हंसते हो तो उन क्षणों के लिए एक गहन ध्यानपूर्ण अवस्था में होते हो। विचार प्रक्रिया रुक जाती है। हंसने के साथ-साथ विचार करना असंभव है। ये दोनों बातें परस्पर विरोधी हैं। या तो तुम हंस सकते हो या विचार ही कर सकते हो। यदि तुम वास्तव में हंसो तो विचार रुक जाता है।

यदि तुम अभी भी विचार कर रहे हो तो तुम्हारा हंसना थोथा और कमजोर होगा। वह हंसी अपंग होगी। जब तुम वास्तव में हंसते हो तो अचानक मन विलीन हो जाता है। जहां तक मैं जानता हूं, नाचना और हंसना सर्वोत्तम एवं सुगम द्वार है। यह दुनिया गंभीर है इसे हास्य के माध्यम से जगाने की जरूरत है। यदि दुनिया हंसना सीख ले तो युद्ध खत्म हो जाए।

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अकारण भी हंसा जा सकता है
जापान में एक अद्भुत संत हुआ ‘होतेई’ । जैसे ही वह ज्ञान को उपलब्ध हुआ वह हंसने लगा। फिर वह जीवन भर हंसता ही रहा। 
‘होतेई’ को जापान में लोग ‘लाफिंग बुद्धा’ कहते हैं। वह गांव-गांव जाता, बीच बाजार में खड़ा हो जाता और हंसने लगता। फिर तो उसका नाम दूर-दूर तक फैल गया।

‘होतेई’ से लोग पूछते, ‘‘आप कुछ और कहें।’’ 

वह कहता ,‘‘और क्या कहें? नाहक रो रहे हो, कोई हंसने वाला चाहिए जो तुम्हें हंसा दे। दिल खोल कर हंसो। सारा अस्तित्व हंस रहा है तुम नाहक रो रहे हो। खोलो आंख, हंस लो। मेरा कोई और संदेश नहीं है। ’’ 

उसने पूरे जापान को हंसाया। लोग हंसते-हंसते धीरे-धीरे अनुभव करते कि हम हंस सकते हैं, हम अकारण प्रसन्न हो सकते हैं। 

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