संगम की रेती पर खुला अनोखा राम नाम बैंक, जहां जमा होती है आस्था की पूंजी

Edited By Updated: 06 Feb, 2026 12:54 PM

prayagraj magh mela 2026

प्रयागराज में चल रहे माघ मेला 2026 में संगम की रेती पर एक ऐसा बैंक चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जहां न तो कोई तिजोरी है और न ही रुपयों का लेनदेन होता है।

Prayagraj Magh Mela 2026 : प्रयागराज में चल रहे माघ मेला 2026 में संगम की रेती पर एक ऐसा बैंक चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जहां न तो कोई तिजोरी है और न ही रुपयों का लेनदेन होता है। यहां 'राम नाम' की अनमोल पूंजी जमा की जाती है, जिसे भक्त अपने लोक और परलोक को सुधारने का माध्यम मानते हैं।

कैसे काम करता है यह बैंक ?
इस बैंक के नियम किसी भी कमर्शियल बैंक से बिल्कुल अलग और आध्यात्मिक हैं। यहां खाता खुलवाने के लिए किसी पहचान पत्र की जरूरत नहीं होती। इसके लिए बस मन की शुद्धता और सात्विक आचरण जरूरी है। भक्तों को बैंक से एक पुस्तिका दी जाती है। इसमें उन्हें लाल स्याही से सवा लाख बार 'राम' नाम लिखना होता है। यही उनकी 'फिक्स्ड डिपॉजिट' कहलाती है। जिस तरह दुनिया के बैंक संकट में पैसा उधार देते हैं, यह बैंक 'राम नाम' की शक्ति उधार देता है। भक्त अपनी मन्नत या संकट दूर करने के लिए नाम-जाप का कर्ज लेते हैं और मनोकामना पूरी होने पर उसे दोगुना-तिगुना लिखकर चुकाते हैं।

नियम जो सबको बांधते हैं
राम नाम बैंक का सदस्य बनने के लिए कुछ कड़े आध्यात्मिक नियमों का पालन करना अनिवार्य है। जो लोग इस बैंक में खाता खुलवाते हैं, उन्हें मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन का त्याग करना होता है। खाताधारक को हमेशा सच बोलने और दूसरों का अहित न करने का संकल्प लेना होता है। राम नाम हमेशा लाल कलम से ही लिखा जाता है, क्योंकि लाल रंग को प्रेम और शक्ति का प्रतीक माना गया है।

देश-विदेश से जुड़ रहे हैं श्रद्धालु
प्रयागराज के संगम तट पर स्थित इस बैंक की शाखा में केवल भारतीय ही नहीं, बल्कि अमेरिका, रूस और यूरोप से आए विदेशी श्रद्धालु भी बड़े चाव से खाता खुलवा रहे हैं। भक्तों का विश्वास है कि राम नाम लिखने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि असाध्य रोगों से भी मुक्ति मिलती है।

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