Kedarnath Yatra 2026 : 13 साल बाद खुला बाबा केदार का पुराना मार्ग, भक्तों में खुशी की लहर

Edited By Updated: 23 Jan, 2026 03:26 PM

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Kedarnath Yatra 2026 : उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम की यात्रा हर श्रद्धालु के लिए एक विशेष अनुभव होती है, जिसका लोग सालभर इंतजार करते हैं। हर वर्ष लाखों भक्त बाबा केदार के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। अब श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई...

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Kedarnath Yatra 2026 : उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम की यात्रा हर श्रद्धालु के लिए एक विशेष अनुभव होती है, जिसका लोग सालभर इंतजार करते हैं। हर वर्ष लाखों भक्त बाबा केदार के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। अब श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केदारनाथ धाम तक जाने वाले पुराने पैदल मार्ग को दोबारा खोल दिया गया है, जिससे यात्रा और भी खास बन गई है।

बताया जा रहा है कि वर्ष 2013 की आपदा में यह पारंपरिक रास्ता पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। अब लोक निर्माण विभाग और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से इस मार्ग का पुनर्निर्माण कर इसे फिर से सुरक्षित बना दिया गया है। इसके चलते तीर्थयात्रियों को एक बार फिर ऐतिहासिक और पारंपरिक रास्ते से बाबा के धाम तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।

इस बार केदारनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के पास रामबाड़ा से मंदिर तक पहुंचने के लिए दो अलग-अलग रास्तों का विकल्प होगा। पहला मार्ग गरुड़चट्टी से केदारनाथ तक लगभग 3.30 किलोमीटर लंबा है, जिसे वर्ष 2024 में तैयार किया गया था। वहीं दूसरा रास्ता रामबाड़ा से गरुड़चट्टी के बीच लगभग 5.35 किलोमीटर का है, जिसे 2023 और 2024 में दो चरणों में बनाया गया। फिलहाल इस मार्ग पर रेलिंग की रंगाई का काम चल रहा है और प्रशासन यह तय करेगा कि यात्रियों को किस रास्ते से भेजा जाएगा।

लोनिवि-डीडीएमए के अधिकारियों के अनुसार, रामबाड़ा से गरुड़चट्टी तक का पैदल मार्ग पूरी तरह तैयार है। बर्फबारी समाप्त होते ही रामबाड़ा में पुल निर्माण का कार्य भी पूरा कर लिया जाएगा, जिससे यात्रा और अधिक सुरक्षित हो सकेगी।

पुराने मार्ग की सबसे खास बात यह है कि इस पर चलते हुए श्रद्धालु ‘देवदर्शनी’ स्थल से होकर सीधे बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे। यह स्थान अपनी दिव्यता और शांति के लिए जाना जाता है, जहां पहुंचकर यात्रियों को अद्भुत सुकून का अनुभव होता है और उनकी थकान दूर हो जाती है।

करीब 8.65 किलोमीटर लंबा यह पारंपरिक मार्ग नए रास्ते की तुलना में लगभग डेढ़ किलोमीटर छोटा है। वर्ष 2026 में इस रास्ते के शुरू होने से श्रद्धालुओं को पुरानी परंपरा से जुड़ने का अवसर मिलेगा और उनकी केदारनाथ यात्रा एक यादगार आध्यात्मिक अनुभव बन जाएगी।

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